विकसित कृषि संकल्प अभियान : क्या 'प्रयोगशाला से भूमि' तक का यह सफर बदल देगा भारतीय खेती की तकदीर?
भारत का कृषि क्षेत्र इस समय एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रहा है। एक तरफ गिरता भूजल और जलवायु परिवर्तन की मार है, तो दूसरी तरफ बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितता। इन चुनौतियों के बीच 29 मई 2025 को शुरू हुआ 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' (VKSA) एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। 15 दिनों के इस सघन अभियान ने न केवल विज्ञान और नीति को जोड़ा है, बल्कि सीधे किसानों की चौपाल तक पहुँचकर भविष्य के 'विकसित भारत' की आधारशिला रखने का प्रयास किया है।
11 Feb 2026
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नई दिल्ली: भारत का कृषि क्षेत्र इस समय एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रहा है। एक तरफ गिरता भूजल और जलवायु परिवर्तन की मार है, तो दूसरी तरफ बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितता। इन चुनौतियों के बीच 29 मई 2025 को शुरू हुआ 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' (VKSA) एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। 15 दिनों के इस सघन अभियान ने न केवल विज्ञान और नीति को जोड़ा है, बल्कि सीधे किसानों की चौपाल तक पहुँचकर भविष्य के 'विकसित भारत' की आधारशिला रखने का प्रयास किया है।
1. अभियान का खाका: मिशन 'प्रयोगशाला से भूमि'
VKSA का मुख्य दर्शन "Lab to Land" (प्रयोगशाला से भूमि तक) है। इसका उद्देश्य कृषि अनुसंधान संस्थानों (ICAR) में विकसित नई तकनीकों और बीजों को एसी कमरों से बाहर निकालकर सीधे किसान के खेत तक पहुँचाना है।
अभियान के मुख्य आंकड़े:
अवधि: 15 दिवसीय सघन कार्यक्रम (समापन 12 जून 2025)।
व्याप्ति: भारत के 700 से अधिक जिले और लगभग 65,000 गाँव।
विशेषज्ञ टीम: 2,170 विशेषज्ञ टीमें, जिनमें वैज्ञानिक और विस्तार अधिकारी शामिल थे।
किसान संपर्क: लगभग 1.08 करोड़ से 1.5 करोड़ किसानों तक सीधी पहुँच।
2. अभियान के प्रमुख स्तंभ और तकनीकी नवाचार
VKSA केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें आधुनिक खेती के व्यावहारिक प्रदर्शनों पर जोर दिया गया:
ड्रोन और सटीक खेती: कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन तकनीक और सटीक सिंचाई उपकरणों का प्रदर्शन किया गया ताकि लागत कम और उत्पादन अधिक हो सके।
प्राकृतिक खेती का लक्ष्य: 2025 तक 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को रसायन मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 18 लाख किसानों ने रुचि दिखाई है।
संबद्ध क्षेत्रों पर ध्यान: केवल अनाज ही नहीं, बल्कि मत्स्य पालन (टीकाकरण कार्यक्रम) और बागवानी (स्वच्छ पौध कार्यक्रम) को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया।
3. जमीनी स्तर पर प्रभाव और प्रारंभिक सफलता
अभियान के पहले चरण के परिणाम उत्साहजनक दिखाई दे रहे हैं:
फीडबैक लूप: 'किसान चौपाल' के माध्यम से वैज्ञानिकों ने सीधे मिट्टी, पानी और कीटों की स्थानीय समस्याओं को समझा। यह "Top-Down" के बजाय "Bottom-Up" दृष्टिकोण है, जहाँ किसानों की प्रतिक्रिया अब भविष्य की अनुसंधान नीति तय करेगी।
समावेशिता: हिमाचल के लाहौल-स्पीति जैसे सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँचकर अभियान ने यह संदेश दिया कि आधुनिक तकनीक केवल मैदानी इलाकों के लिए नहीं है।
मांग में वृद्धि: गुजरात और अन्य राज्यों में वैज्ञानिक नवाचारों और बेहतर बीजों की मांग में भारी उछाल देखा गया है, जो किसानों की जागरूकता को दर्शाता है।
4. आगे की राह: क्या यह स्थायी बदलाव ला पाएगा?
VKSA की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि 15 दिनों के इस अभियान के बाद 'फॉलो-अप' (Follow-up) कैसा रहता है। सरकार अब "फसल युद्ध" (Crop-specific missions) और राज्य-विशिष्ट रणनीतियों पर काम कर रही है।
निष्कर्ष: विकसित कृषि संकल्प अभियान ने भारतीय कृषि की जकड़न को तोड़ने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है। यदि इस अभियान से प्राप्त डेटा और फीडबैक को समय पर इनपुट (बीज, खाद, बाजार पहुँच) के साथ जोड़ा गया, तो यह निश्चित रूप से 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में कृषि को सबसे बड़ा इंजन बना सकता है।