'ओ रोमियो' की रिलीज से पहले भावुक हुए विशाल भारद्वाज: "इस फिल्म के जरिए खुद के भीतर की नफरत और प्यार को पहचाना"
अपनी अनूठी कहानी और सिनेमाई जादू के लिए मशहूर दिग्गज फिल्मकार विशाल भारद्वाज की नई फिल्म 'ओ रोमियो' बड़े पर्दे पर दस्तक देने के लिए तैयार है। फिल्म की रिलीज से महज एक दिन पहले, विशाल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक नोट साझा किया है, जिसमें उन्होंने अपने रचनात्मक संघर्षों और उस तीव्र भावनात्मक यात्रा का जिक्र किया है जिससे गुजरकर यह फिल्म बनी है।
12 Feb 2026
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मुंबई: अपनी अनूठी कहानी और सिनेमाई जादू के लिए मशहूर दिग्गज फिल्मकार विशाल भारद्वाज की नई फिल्म 'ओ रोमियो' बड़े पर्दे पर दस्तक देने के लिए तैयार है। फिल्म की रिलीज से महज एक दिन पहले, विशाल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक नोट साझा किया है, जिसमें उन्होंने अपने रचनात्मक संघर्षों और उस तीव्र भावनात्मक यात्रा का जिक्र किया है जिससे गुजरकर यह फिल्म बनी है।
"मुझे इस फिल्म पर गर्व है"
बॉक्स ऑफिस के नतीजों और आलोचकों की प्रतिक्रिया से बेफिक्र होकर विशाल भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि यह फिल्म उनके दिल के बेहद करीब है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा:
"इससे पहले कि समीक्षक कुछ कहें या बॉक्स ऑफिस अपना फैसला सुनाए, मैं यह साझा करना जरूरी समझता हूँ कि मुझे इस फिल्म पर बहुत गर्व है। प्रशंसा या आलोचना आने से पहले, मैं अपने दिल की गहराइयों से अपने उन सभी विभाग प्रमुखों (HODs) का आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने उम्मीद से कहीं ज्यादा दिया—अपनी दृष्टि, अपनी निष्ठा, अपना पसीना, अपना खून और मेरी परिकल्पना के प्रति अपनी बिना शर्त प्रतिबद्धता।"
प्रतिशोध और न्याय की तलाश
विशाल भारद्वाज अपनी फिल्मों में मानवीय भावनाओं के जटिल चित्रण के लिए जाने जाते हैं। 'ओ रोमियो' के बारे में बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि इस फिल्म ने उन्हें खुद के भीतर छिपे द्वंद्वों का सामना करने में मदद की है।
प्रेम और हिंसा का संगम: विशाल ने साझा किया कि इस फिल्म के जरिए उन्हें अहसास हुआ कि उनके भीतर प्रेम और हिंसा, दोनों को एक साथ समेटने की अपार क्षमता है।
अचेतन मन में प्रतिशोध: उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें हाल ही में यह अहसास हुआ कि 'प्रतिशोध' की भावना ने अनजाने में उनके अब तक के अधिकांश कार्यों को आकार दिया है।
समाज का प्रभाव: समाज में व्याप्त हिंसा और अन्याय पर पीड़ा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, "मैं अक्सर इसके खिलाफ खुद को लाचार महसूस करता हूँ। यह मुझे अंदर तक जख्मी कर देता है। इस संचित पीड़ा (anguish) को बाहर निकलने के लिए एक रास्ते की जरूरत थी।"
एक व्यक्तिगत सिनेमाई सफर
विशाल के इस नोट से स्पष्ट है कि 'ओ रोमियो' केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उनके भीतर पनप रहे आक्रोश और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है। दर्शकों और सिनेमा प्रेमियों के बीच अब इस फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है, क्योंकि यह सीधे निर्देशक के दिल से निकली एक कृति नजर आ रही है।