भारतीय अर्थव्यवस्था का 'नया पैमाना': CPI का आधार वर्ष बदलकर हुआ 2024, जनवरी में महंगाई दर 2.75%
भारत सरकार ने देश के सबसे महत्वपूर्ण व्यापक आर्थिक संकेतक, खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) की गणना के तरीके में ऐतिहासिक बदलाव किया है। MoSPI ने गुरुवार को घोषणा की कि अब खुदरा महंगाई की गणना 2012 के बजाय 2024 को आधार वर्ष मानकर की जाएगी। इस नई पद्धति के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर 2.75% दर्ज की गई है।
13 Feb 2026
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नई दिल्ली | भारत सरकार ने देश के सबसे महत्वपूर्ण व्यापक आर्थिक संकेतक, खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) की गणना के तरीके में ऐतिहासिक बदलाव किया है। MoSPI ने गुरुवार को घोषणा की कि अब खुदरा महंगाई की गणना 2012 के बजाय 2024 को आधार वर्ष मानकर की जाएगी। इस नई पद्धति के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर 2.75% दर्ज की गई है।
नए और पुराने आंकड़ों का अंतर
पुरानी सीरीज (2012 आधार वर्ष) के तहत दिसंबर 2025 में महंगाई दर मात्र 1.33% थी। नई सीरीज में जनवरी का आंकड़ा 2.75% होना यह दर्शाता है कि उपभोग टोकरी में बदलाव के कारण कीमतों का सटीक आकलन अब बेहतर तरीके से हो रहा है।
क्या-क्या बदला नई CPI टोकरी में?
नया सूचकांक घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) 2023-24 के परिणामों पर आधारित है, जो भारतीयों के बदलते खर्च करने के तौर-तरीकों को दर्शाता है।
वस्तुओं की संख्या: अब टोकरी में 358 वस्तुएं और सेवाएं शामिल हैं (पहले 299 थीं)।
क्या जुड़ा: आधुनिक जीवनशैली को देखते हुए एयरपॉड्स (Airpods), ऑनलाइन मीडिया स्ट्रीमिंग, पेन-ड्राइव और बेबीसिटर जैसी सेवाओं को जोड़ा गया है।
क्या हटा: पुराने हो चुके ऑडियो कैसेट, वीसीआर/वीसीडी प्लेयर और रेडियो जैसे सामानों को सूची से बाहर कर दिया गया है।
खाद्य वस्तुओं का भार: खाद्य और पेय पदार्थों का कुल वजन 45.9% से घटकर 36.8% रह गया है, जो यह दर्शाता है कि अब भारतीय अपनी आय का कम हिस्सा भोजन पर और अधिक हिस्सा सेवाओं/सुविधाओं पर खर्च कर रहे हैं।
महंगाई के प्रमुख कारक: टमाटर बनाम अन्य सब्जियां
जनवरी में महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण खाद्य कीमतों में उछाल रहा। टमाटर की महंगाई दर 64.8% तक पहुंच गई, जबकि इसके विपरीत प्याज (-29.3%), आलू (-29%) और लहसुन (-53%) की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
| श्रेणी | महंगाई दर (जनवरी 2026) |
|---|---|
| खाद्य मुद्रास्फीति (Food) | 2.13% |
| शिक्षा (Education) | 3.35% |
| स्वास्थ्य (Health) | 2.19% |
| व्यक्तिगत देखभाल (Personal Care) | 19.02% (सोने-चांदी के कारण) |
| सिल्वर ज्वेलरी (Silver Jewellery) | 160% (रिकॉर्ड स्तर) |
आने वाले बड़े बदलाव: GDP और IIP की बारी
यह सुधार केवल महंगाई दर तक सीमित नहीं है। मंत्रालय ने आने वाले समय के लिए एक व्यापक रोडमैप पेश किया है:
27 फरवरी, 2026: जीडीपी (GDP) की नई सीरीज जारी होगी, जिसका आधार वर्ष 2022-23 होगा।
मई 2026: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की नई सीरीज आएगी, इसका भी आधार वर्ष 2022-23 रखा गया है।
विशेषज्ञों की राय: अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस आधुनिकीकरण से भारतीय अर्थव्यवस्था के आंकड़े अधिक पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो जाएंगे, जिससे नीति निर्माताओं को सटीक निर्णय लेने में मदद मिलेगी।