भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता: अप्रैल 2026 से खुलेंगे आर्थिक समृद्धि के द्वार

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। पिछले वर्ष जुलाई में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अप्रैल 2026 से प्रभावी होने की प्रबल संभावना है। इस समझौते से न केवल दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, बल्कि 2030 तक आपसी व्यापार को दोगुना कर 56 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

15 Feb 2026  |  38

नई दिल्ली | भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। पिछले वर्ष जुलाई में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अप्रैल 2026 से प्रभावी होने की प्रबल संभावना है। इस समझौते से न केवल दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, बल्कि 2030 तक आपसी व्यापार को दोगुना कर 56 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

ब्रिटिश संसद की मुहर का इंतज़ार

समझौते को अंतिम रूप देने के लिए वर्तमान में यह ब्रिटिश संसद की प्रक्रिया के अधीन है। इस सप्ताह की शुरुआत में 'हाउस ऑफ कॉमन्स' में इस पर चर्चा हुई, जहाँ व्यापार एवं उद्योग राज्य मंत्री क्रिस ब्रायंट ने इसे एक "बड़ी उपलब्धि" करार दिया। संसदीय नियमों के अनुसार, हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बहस और समितियों की समीक्षा के बाद इसे आधिकारिक मंजूरी दी जाएगी। भारत में, केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद इसे लागू करने की तिथि पर अंतिम सहमति बनेगी।

व्यापार के नए समीकरण: क्या सस्ता होगा और क्या मिलेगा फायदा?

यह समझौता दुनिया की पाँचवीं (भारत) और छठी (ब्रिटेन) सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह को सुगम बनाएगा।

भारतीय निर्यात को पंख: भारत के 99% निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में शून्य शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। इसमें विशेष रूप से वस्त्र, जूते, रत्न-आभूषण, खेल सामग्री और खिलौने शामिल हैं।

ब्रिटिश उत्पादों की दस्तक: भारत ने चॉकलेट, बिस्कुट और प्रसाधन सामग्री (Cosmetics) जैसे उपभोक्ता उत्पादों के लिए अपने बाजार खोल दिए हैं।

व्हिस्की और ऑटोमोबाइल: स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क तत्काल 150% से घटाकर 75% किया जाएगा, जिसे 2035 तक 40% पर लाने का लक्ष्य है। वहीं, कारों पर लगने वाले 110% शुल्क को अगले 5 वर्षों में घटाकर मात्र 10% कर दिया जाएगा।

प्रमुख आकर्षण: डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन

वस्तुओं के आदान-प्रदान के अलावा, दोनों देशों ने 'डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन' पर भी हस्ताक्षर किए हैं। यह अस्थायी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि अब उन्हें दोनों देशों में सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Social Security Contribution) दोबारा नहीं देना होगा। माना जा रहा है कि यह कन्वेंशन और FTA दोनों एक साथ लागू किए जाएंगे।

"यह समझौता ब्रिटेन के कारोबार के लिए भारत के विशाल बाजार के दरवाजे पहले से कहीं अधिक मजबूती से खोलेगा।"

क्रिस ब्रायंट, राज्य मंत्री, ब्रिटेन

एक नज़र में समझौते के प्रभाव

क्षेत्रवर्तमान स्थितिसमझौते के बाद (संभावित)
भारतीय निर्यातविभिन्न शुल्क99% उत्पादों पर 0% शुल्क
स्कॉच व्हिस्की150% शुल्कतत्काल 75%, भविष्य में 40%
ब्रिटिश कारें110% शुल्क5 वर्षों में घटकर 10%
रोजगारदोहरा सामाजिक अंशदानकेवल एक देश में अंशदान की सुविधा

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