एआई 'डिटर्मिनिज्म': क्या खुद को बनाने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय आईटी साम्राज्य के लिए खतरा है?

भारतीय शेयर बाजारों में आज सुबह एक अजीब सी बेचैनी देखी गई। शुक्रवार की भारी गिरावट के बाद बाजार लाल निशान में खुले, हालांकि बाद में मामूली सुधार दिखा। लेकिन इस उतार-चढ़ाव के पीछे केवल वैश्विक आर्थिक कारक नहीं, बल्कि 'एआई स्केयर ट्रेडिंग' (AI Scare Trading) का साया है। नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' के बीच निवेशक एक ही सवाल पूछ रहे हैं: क्या भारत का 300 अरब डॉलर का आईटी सेवा उद्योग एआई के इस चक्रवात का सामना करने के लिए तैयार है?

16 Feb 2026  |  29

नई दिल्ली |भारतीय शेयर बाजारों में आज सुबह एक अजीब सी बेचैनी देखी गई। शुक्रवार की भारी गिरावट के बाद बाजार लाल निशान में खुले, हालांकि बाद में मामूली सुधार दिखा। लेकिन इस उतार-चढ़ाव के पीछे केवल वैश्विक आर्थिक कारक नहीं, बल्कि 'एआई स्केयर ट्रेडिंग' (AI Scare Trading) का साया है। नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' के बीच निवेशक एक ही सवाल पूछ रहे हैं: क्या भारत का 300 अरब डॉलर का आईटी सेवा उद्योग एआई के इस चक्रवात का सामना करने के लिए तैयार है?

'सेल्फ-इवॉल्विंग' एआई: जब मशीन ही बनी शिल्पकार

बाजार में इस घबराहट की मुख्य वजह हाल ही में जारी OpenAI का GPT-5.3 Codex और Anthropic का Opus 4.6 मॉडल हैं। सबसे चौंकाने वाला खुलासा OpenAI के तकनीकी दस्तावेज़ों में हुआ, जिसमें कहा गया कि GPT-5.3 Codex ने खुद को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

दस्तावेज़ के अनुसार, "कोडेक्स टीम ने इसके शुरुआती संस्करणों का उपयोग स्वयं के प्रशिक्षण को ठीक करने (debug), परिनियोजन (deployment) को प्रबंधित करने और परिणामों के निदान के लिए किया।" सरल शब्दों में कहें तो, एआई अब इतना सक्षम हो गया है कि वह अपने अगले और बेहतर संस्करण को खुद डिजाइन कर रहा है।

आईटी सेक्टर पर मंडराते संकट के बादल

जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने संकेत दिया है कि निवेशक इस बात से डरे हुए हैं कि भारतीय आईटी कंपनियां अपने विकास लक्ष्यों से चूक सकती हैं। डर यह है कि क्लाइंट अब अपना बजट पारंपरिक आईटी सेवाओं से हटाकर सीधे इन उन्नत एआई टूल्स पर खर्च करेंगे।

शुक्रवार को भारतीय आईटी शेयरों ने मार्च 2020 के बाद अपना सबसे खराब सप्ताह देखा, जिसमें बाजार मूल्य में लगभग 50 अरब डॉलर की भारी गिरावट आई। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई के बयान ने इस आग में घी डालने का काम किया है, उनका कहना है:

"हम उस बिंदु से केवल 1-2 साल दूर हैं जहाँ एआई की वर्तमान पीढ़ी स्वायत्त रूप से अगली पीढ़ी का निर्माण करेगी।"

क्या यह डर निराधार है?

हालाँकि, समिट में शामिल भारतीय आईटी दिग्गजों का नजरिया थोड़ा अलग है। उनका तर्क है कि वर्तमान में उत्पादकता में जो भी उछाल आ रहा है, उसमें 'ह्यूमन-इन-द-लूप' यानी इंसानी हस्तक्षेप अभी भी अनिवार्य है। रॉयटर्स के अनुसार, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह सोचना बहुत सरल होगा कि एआई रातों-रात एंटरप्राइज-ग्रेड सॉफ्टवेयर बना देगा और आईटी फर्मों की पूरी वैल्यू चेन को खत्म कर देगा।

अदर्सइड एआई (OthersideAI) के सीईओ मैट शुमर का कहना है कि यह पूरी तकनीक मुट्ठी भर शोधकर्ताओं और कंपनियों (OpenAI, Google DeepMind, Anthropic) के हाथों में है। 2025 की शुरुआत से मॉडल बनाने की तकनीकों में जो गति आई है, उसने विकास की पूरी दिशा बदल दी है।

आगे की राह

बाजार इस समय अनिश्चितता के दौर में है। एक तरफ एआई द्वारा दी जाने वाली अभूतपूर्व उत्पादकता का वादा है, तो दूसरी तरफ पारंपरिक बिजनेस मॉडल के ढहने का डर। आने वाले कुछ दिन और नई दिल्ली में हो रही घोषणाएं यह तय करेंगी कि भारतीय टेक दिग्गज इस बदलाव के शिकार होंगे या इसके सारथी।

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