ग्लोबल ऑयल मार्केट में चीन का बड़ा दांव: रूसी तेल आयात में बनाया नया रिकॉर्ड; भारत को पछाड़कर बना मॉस्को का सबसे बड़ा ग्राहक

वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर भारत ने रूसी तेल से अपनी दूरियां बढ़ानी शुरू की हैं, वहीं दूसरी ओर चीन ने इस मौके का फायदा उठाते हुए रूसी कच्चे तेल की खरीद में अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। फरवरी महीने के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, चीन का रूसी तेल आयात अपने चरम पर पहुँचने वाला है।

16 Feb 2026  |  34

बीजिंग/नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर भारत ने रूसी तेल से अपनी दूरियां बढ़ानी शुरू की हैं, वहीं दूसरी ओर चीन ने इस मौके का फायदा उठाते हुए रूसी कच्चे तेल की खरीद में अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। फरवरी महीने के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, चीन का रूसी तेल आयात अपने चरम पर पहुँचने वाला है।

चीन की 'रिकॉर्ड' तोड़ खरीदारी: आंकड़ों की जुबानी

शिप ट्रैकिंग डेटा और 'वॉर्टेक्सा एनालिटिक्स' के अनुसार, चीन लगातार तीसरे महीने रूसी तेल की खरीद बढ़ा रहा है:

फरवरी का अनुमान: चीन को रूसी कच्चे तेल की सप्लाई 20 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) से अधिक होने का अनुमान है।

जनवरी बनाम फरवरी: जनवरी में यह आंकड़ा 17 लाख bpd था, जो फरवरी में बढ़कर 20.83 लाख bpd तक पहुँच गया है (केप्लर के आंकड़ों के अनुसार)।

भारत की स्थिति: अमेरिकी प्रतिबंधों और यूक्रेन युद्ध के दबाव के चलते भारत का आयात घटकर 1.159 मिलियन bpd रह गया है, जो पिछले 2 वर्षों का सबसे निचला स्तर है।

क्यों बढ़ा चीन का रुझान?

चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें 'टीपॉट्स' (Teapots) के नाम से जाना जाता है, रूसी तेल की ओर तेजी से आकर्षित हो रही हैं। इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:

भारी डिस्काउंट: भारतीय बाजार से सप्लाई कम होने के कारण रूसी तेल (Urals) की कीमतें बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की तुलना में 9 से 11 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई हैं।

ईरानी तेल पर अनिश्चितता: वाशिंगटन और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और परमाणु समझौते की विफलताओं के डर से चीनी व्यापारी अब ईरानी तेल के बजाय रूसी तेल को अधिक 'भरोसेमंद' और सुरक्षित मान रहे हैं।

ईरान बनाम रूस: तेल की जंग

चीन को होने वाली ईरानी तेल की सप्लाई (जिसे अक्सर मलेशियाई तेल बताकर बेचा जाता है) में गिरावट देखी गई है।

ईरानी तेल सप्लाई: जनवरी के 1.25 मिलियन bpd से घटकर फरवरी में 1.03 मिलियन bpd रह गई है।

विश्लेषकों का मानना है कि 'टीपॉट्स' रिफाइनरियों के लिए रूसी सप्लाई अब ईरानी लाइट क्रूड के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी और जोखिम मुक्त हो गई है।

"छोटे व्यवसायों के लिए, रूसी तेल अब अधिक भरोसेमंद लग रहा है। सैन्य टकराव की स्थिति में लोग ईरानी तेल की सप्लाई को लेकर चिंतित हैं, जिसका सीधा फायदा रूस को मिल रहा है।"एम्मा ली, चीन विश्लेषक (वॉर्टेक्सा)

निष्कर्ष: बदलता समीकरण

नवंबर के बाद से चीन ने मॉस्को के समुद्री मार्ग से होने वाले तेल शिपमेंट के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है। जहाँ पश्चिमी प्रतिबंधों ने भारत के लिए मुश्किलें खड़ी की हैं, वहीं चीन ने इन रियायती दरों का लाभ उठाकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत कर लिया है।

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