जब 'O' के पीले रंग के लिए स्टीव जॉब्स ने गूगल को मिलाया फोन; जानें तकनीक की दुनिया का सबसे मशहूर 'आइकन एम्बुलेंस' किस्सा

तकनीक की दुनिया में कई बड़े बदलावों की कहानियां दर्ज हैं, लेकिन जनवरी 2008 की एक रविवार सुबह जो हुआ, वह बताता है कि महान उत्पाद केवल तकनीक से नहीं, बल्कि अटूट बारीकी (Attention to Detail) से बनते हैं। यह कहानी है एपल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और गूगल के तत्कालीन सीनियर वाइस प्रेसिडेंट विक गुंडोत्रा के बीच हुई एक ऐसी बातचीत की, जिसने 'डिजाइन परफेक्शन' के मायने बदल दिए।

16 Feb 2026  |  36

सिलिकॉन वैली: तकनीक की दुनिया में कई बड़े बदलावों की कहानियां दर्ज हैं, लेकिन जनवरी 2008 की एक रविवार सुबह जो हुआ, वह बताता है कि महान उत्पाद केवल तकनीक से नहीं, बल्कि अटूट बारीकी (Attention to Detail) से बनते हैं। यह कहानी है एपल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और गूगल के तत्कालीन सीनियर वाइस प्रेसिडेंट विक गुंडोत्रा के बीच हुई एक ऐसी बातचीत की, जिसने 'डिजाइन परफेक्शन' के मायने बदल दिए।

चर्च में गूंजी स्टीव जॉब्स की 'अर्जेंट' कॉल

एक रविवार सुबह विक गुंडोत्रा अपने परिवार के साथ चर्च में थे, जब उनके फोन पर स्टीव जॉब्स का कॉल आया। गुंडोत्रा ने शुरू में फोन नहीं उठाया, लेकिन जब वॉइसमेल सुना तो पता चला कि जॉब्स इसे 'अत्यंत जरूरी' (Urgent) बता रहे हैं। जब गुंडोत्रा ने वापस कॉल किया, तो जॉब्स ने मजाक में कहा, "विक, अगर कॉलर आईडी पर 'GOD' नहीं लिखा था, तो तुम्हें चर्च में फोन नहीं उठाना चाहिए था।"

मजाक के तुरंत बाद जॉब्स सीधे मुद्दे पर आ गए। उन्होंने कहा:

"विक, मैंने आईफोन पर गूगल का लोगो देखा। इसके दूसरे 'O' के पीले रंग का ग्रेडिएंट (Gradient) थोड़ा गलत लग रहा है। यह आंखों को खटक रहा है।"

'आइकन एम्बुलेंस': जब पिक्सल-पिक्सल पर हुई बात

हैरानी की बात यह थी कि समस्या गूगल के मूल लोगो में नहीं थी, बल्कि आईफोन की स्क्रीन पर उसकी रेंडरिंग (Rendering) में थी। जॉब्स के लिए यह महज एक आइकन नहीं था; उनके लिए आईफोन पर दिखने वाली हर पिक्सल का सही होना अनिवार्य था।

तत्काल कार्रवाई: जॉब्स ने एपल के इंजीनियर ग्रेग क्रिस्टी को तुरंत सुधार के निर्देश दिए।

ईमेल का शीर्षक: कुछ ही देर में गुंडोत्रा को "Icon Ambulance" सब्जेक्ट लाइन के साथ एक ईमेल मिला, जिसमें सही कलर ग्रेडिएंट वाली फाइल संलग्न थी।

तीन साल बाद दुनिया के सामने आई सच्चाई

विक गुंडोत्रा ने इस किस्से को तीन साल तक छिपा कर रखा। उन्होंने 2011 में जब स्टीव जॉब्स ने सीईओ पद से इस्तीफा दिया, तब इसे Google+ पर साझा किया। गुंडोत्रा ने लिखा कि यह घटना उन्हें सिखाती है कि एक महान लीडर को हर छोटी से छोटी डिटेल की परवाह होनी चाहिए, चाहे वह रविवार का दिन ही क्यों न हो।

डिजाइन फिलॉसफी की मिसाल

यह किस्सा आज भी प्रबंधन और डिजाइन की कक्षाओं में पढ़ाया जाता है। यह साबित करता है कि स्टीव जॉब्स के लिए उत्पाद केवल 'काम करने वाला' (Functional) होना काफी नहीं था, उसे 'सुंदर और त्रुटिहीन' (Aesthetic and Flawless) होना भी जरूरी था। यही वह नजरिया था जिसने एपल को दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित कंपनी बनाया।

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