विदाई भाषण में मोहम्मद यूनुस के तीखे तेवर: 'सेवन सिस्टर्स' पर टिप्पणी और चीन से बढ़ती नजदीकी ने बढ़ाई भारत की चिंता

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अपने विदाई भाषण में कड़ा राष्ट्रवादी रुख अपनाते हुए भारत के प्रति आक्रामक संकेत दिए हैं। 18 महीने के कार्यकाल के बाद पद छोड़ रहे यूनुस ने अपने संबोधन में बांग्लादेश की "संप्रभुता और गरिमा" की बहाली का दावा किया, लेकिन उनके भाषण में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (सेवन सिस्टर्स) का जिक्र और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चुप्पी ने नए विवाद को जन्म दे दिया है।

17 Feb 2026  |  31

ढाका: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अपने विदाई भाषण में कड़ा राष्ट्रवादी रुख अपनाते हुए भारत के प्रति आक्रामक संकेत दिए हैं। 18 महीने के कार्यकाल के बाद पद छोड़ रहे यूनुस ने अपने संबोधन में बांग्लादेश की "संप्रभुता और गरिमा" की बहाली का दावा किया, लेकिन उनके भाषण में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (सेवन सिस्टर्स) का जिक्र और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चुप्पी ने नए विवाद को जन्म दे दिया है।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर विवादास्पद टिप्पणी

यूनुस ने अपने भाषण में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण की बात करते हुए नेपाल और भूटान के साथ भारत के 'सेवन सिस्टर्स' (पूर्वोत्तर राज्यों) का नाम लिया। उन्होंने कहा:

"नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स के साथ इस क्षेत्र में अपार आर्थिक क्षमता है। आर्थिक क्षेत्र और व्यापार समझौते हमें एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर सकते हैं।"

कूटनीतिक चिंता: भारत के अभिन्न अंग 'सेवन सिस्टर्स' को संप्रभु देशों (नेपाल-भूटान) के साथ एक ही श्रेणी में रखना नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय है। जानकारों का मानना है कि यह भारत के आंतरिक मामलों और भौगोलिक अखंडता को उकसाने का एक प्रयास हो सकता है।

चीन की ओर झुकाव और सामरिक संतुलन

यूनुस ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश अब किसी बाहरी निर्देश (परखने पर जिसका संकेत भारत की ओर था) पर नहीं चलेगा। उन्होंने चीन के साथ गहरे होते संबंधों का विशेष उल्लेख किया:

तीस्ता नदी परियोजना: उन्होंने रणनीतिक रूप से संवेदनशील तीस्ता परियोजना पर चीन के साथ प्रगति का जिक्र किया। यह क्षेत्र भारत के 'सिलिगुड़ी कॉरिडोर' (चिकन नेक) के करीब है, जिसे लेकर भारत हमेशा सतर्क रहा है।

सैन्य आधुनिकीकरण: उन्होंने किसी भी "आक्रमण" का जवाब देने के लिए सेना को मजबूत करने की बात कही, जिसे उनके संप्रभुता वाले विमर्श से जोड़कर देखा जा रहा है।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चुप्पी

भाषण का सबसे चौंकाने वाला पहलू वह था जिसे यूनुस ने 'नहीं' कहा। जुलाई 2024 के विद्रोह के बाद बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुई बड़े पैमाने पर हिंसा, मंदिरों में तोड़फोड़ और कट्टरपंथी समूहों के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कोई जवाबदेही स्वीकार नहीं की।

आलोचना के मुख्य बिंदु:

विफलता को छिपाना: मानवाधिकार समूहों ने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में सुस्त रही।

लोकतांत्रिक सुधार: आलोचकों का तर्क है कि यूनुस सरकार ने बुनियादी सुरक्षा और लोकतांत्रिक विश्वास बहाली के अपने मुख्य वादे को पूरा नहीं किया।

पाक-समर्थक झुकाव: उन पर विदेशी नीति में भारत-विरोधी और पाकिस्तान-समर्थक रुख अपनाने के आरोप लगते रहे हैं।

आंकड़ों में बांग्लादेश की स्थिति (2024-25)

क्षेत्रवर्तमान स्थिति
द्विपक्षीय व्यापार (भारत-बांग्लादेश)लगभग $13-15 बिलियन वार्षिक
हिंदू जनसंख्याकुल आबादी का लगभग 7.9% (लगातार हमलों और पलायन के खतरे के बीच)
विदेशी निवेशचीन का निवेश बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है।

निष्कर्ष

मोहम्मद यूनुस का विदाई भाषण एक एकजुट करने वाले नेता के बजाय एक रक्षात्मक राजनीतिज्ञ जैसा नजर आया। अपनी घरेलू विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए उन्होंने क्षेत्रीय भू-राजनीति को उकसाने का रास्ता चुना। अब गेंद नवनिर्वाचित सरकार के पाले में है कि वह भारत के साथ बिगड़े संबंधों को कैसे सुधारती है।

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