मिजोरम में नशे के खिलाफ 'सर्जिकल स्ट्राइक': ₹1,047 करोड़ के मादक पदार्थ जब्त; राज्यपाल ने विधानसभा में पेश किया सुरक्षा रिपोर्ट कार्ड

मिजोरम के राज्यपाल जनरल (सेवानिवृत्त) विजय कुमार सिंह ने मंगलवार को विधानसभा के बजट सत्र के उद्घाटन अवसर पर राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर एक प्रभावशाली रिपोर्ट पेश की। राज्यपाल ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सुरक्षा बलों ने सीमा पार तस्करी और ड्रग ट्रैफिकिंग के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹1,047 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए हैं।

17 Feb 2026  |  23

आइजोल |  मिजोरम के राज्यपाल जनरल (सेवानिवृत्त) विजय कुमार सिंह ने मंगलवार को विधानसभा के बजट सत्र के उद्घाटन अवसर पर राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर एक प्रभावशाली रिपोर्ट पेश की। राज्यपाल ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सुरक्षा बलों ने सीमा पार तस्करी और ड्रग ट्रैफिकिंग के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹1,047 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए हैं।

ड्रग्स और तस्करी पर 'जीरो टॉलरेंस'

राज्यपाल सिंह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य पुलिस, असम राइफल्स और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच बेहतर समन्वय के कारण अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी की गई है।

बड़ी बरामदगी: ₹1,047 करोड़ की ड्रग्स के साथ-साथ भारी मात्रा में सुपारी (Areca Nuts), विदेशी शराब, हथियार, विस्फोटक और नकली मुद्रा भी जब्त की गई है।

गिरफ्तारियाँ: इस वित्तीय वर्ष में अब तक 652 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है और 487 किलोग्राम प्रतिबंधित सामग्री बरामद की गई है।

शराबबंदी कानून में बदलाव और सख्ती

राज्यपाल ने 'मिजोरम शराब अधिनियम, 2019' के कार्यान्वयन पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में संशोधित किए गए नियमों के बाद प्रशासन और सख्त हुआ है:

संशोधित नियम: अब विदेशी और घरेलू गणमान्य व्यक्तियों के लिए शराब की आंशिक बिक्री और स्थानीय फलों से बने वाइन व 'फ्रूट बियर' के उत्पादन की अनुमति दी गई है।

कार्रवाई: अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच केवल तीन महीनों में शराब से संबंधित 4,915 मामले दर्ज किए गए और 4,532 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

आधुनिक तकनीक और संस्थागत मजबूती

राज्य की कानून प्रवर्तन क्षमता को बढ़ाने के लिए कई नए कदम उठाए गए हैं:

बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण: विदेशी नागरिकों का व्यापक बायोमेट्रिक डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।

फॉरेंसिक लैब: नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी के साथ सहयोग और 'डिस्ट्रिक्ट मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट्स' की शुरुआत की गई है।

अभियोजन निदेशालय: कानूनी प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए अलग से 'डायरेक्टोरेट ऑफ प्रॉसिक्यूशन' की स्थापना की गई है।

ट्रेंडिंग