रणदीप सुरजेवाला के गंभीर आरोप: "नशे का नासूर"
रणदीप सुरजेवाला ने नायब सिंह सैनी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हरियाणा में नशा तस्करी (Drug Trafficking) के मामले पिछले कुछ समय में तेजी से बढ़े हैं। उनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
17 Feb 2026
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रणदीप सुरजेवाला ने नायब सिंह सैनी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हरियाणा में नशा तस्करी (Drug Trafficking) के मामले पिछले कुछ समय में तेजी से बढ़े हैं। उनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
81% की वृद्धि: सुरजेवाला के अनुसार, नए साल (2026) के शुरुआती डेढ़ महीने में ही नशा सप्लाई के अपराधों में 81 प्रतिशत का उछाल देखा गया है।
मेडिकल नशे का काला कारोबार: उन्होंने आरोप लगाया कि दवा की दुकानों (Pharmacies) से खुलेआम 'मेडिकल नशा' बेचा जा रहा है।
दामों में भारी लूट: उन्होंने दावा किया कि ₹40 MRP वाला इंजेक्शन माफियाओं द्वारा ₹1,000 में बेचा जा रहा है, जबकि 10 ML का डोज सेट ₹100 में उपलब्ध है।
युवाओं की दुर्दशा: सुरजेवाला ने विचलित करने वाली जानकारी दी कि युवा अब नसों से निकाले गए खून में गोलियां घोलकर इंजेक्शन ले रहे हैं, जो जानलेवा साबित हो रहा है।
हरियाणा में नशे की वर्तमान स्थिति (2025-26)
हालिया आंकड़ों और सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, हरियाणा में नशे के खिलाफ अभियान और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आता है:
| विवरण | सांख्यिकी/तथ्य (वर्ष 2025-26) |
|---|---|
| गिरफ्तारियाँ (2025) | हरियाणा पुलिस ने 2025 में NDPS एक्ट के तहत रिकॉर्ड 6,801 लोगों को गिरफ्तार किया। |
| दर्ज मामले (FIRs) | वर्ष 2025 में कुल 3,738 FIR दर्ज की गईं। |
| हेरोइन की जब्ती | 2025 में अकेले 55.84 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई, जो अब तक के उच्चतम स्तरों में से एक है। |
| ओवरचार्जिंग मामले | हरियाणा सरकार ने दवाओं की ओवरचार्जिंग के 33 मामले NPPA (नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी) को भेजे हैं। |
सरकार का रुख और पुलिस की रणनीति
जहाँ विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, वहीं हरियाणा पुलिस ने 2026 के लिए एक 'विस्तारित अपराध और सुरक्षा रणनीति' (Expanded Crime Strategy) तैयार की है।
DGP का निर्देश: पुलिस महानिदेशक ने नशा तस्करों की संपत्तियां कुर्क करने और 'किंगपिन' (मुख्य सरगनाओं) पर वित्तीय चोट करने के निर्देश दिए हैं।
नशामुक्ति केंद्र: नशामुक्ति सेवाओं को अब सामाजिक न्याय विभाग से हटाकर स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया गया है ताकि उपचार और पुनर्वास अधिक प्रभावी हो सके।
निष्कर्ष: सुरजेवाला के आरोप 'मेडिकल माफिया' और 'सफेदपोश संरक्षण' की ओर इशारा करते हैं, जो राज्य के युवाओं के भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है।