पश्चिम एशिया में महायुद्ध की आहट: अमेरिका ने तैनात किए ५० लड़ाकू विमान, खामेनेई की 'समुद्र में डुबोने' की धमकी

पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों के बीच युद्ध के बादल गहरे होने लगे हैं। जिनेवा में जारी कूटनीतिक वार्ताओं के बावजूद, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। पिछले २४ घंटों में अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व में अपनी वायु शक्ति को अचानक बढ़ाने और ईरान के सर्वोच्च नेता द्वारा दिए गए कड़े बयान ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है।

18 Feb 2026  |  31

जिनेवा/तेहरान: पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों के बीच युद्ध के बादल गहरे होने लगे हैं। जिनेवा में जारी कूटनीतिक वार्ताओं के बावजूद, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। पिछले २४ घंटों में अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व में अपनी वायु शक्ति को अचानक बढ़ाने और ईरान के सर्वोच्च नेता द्वारा दिए गए कड़े बयान ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है।

अमेरिकी सैन्य घेराबंदी: आसमान से समंदर तक पहरा

ताजा खुफिया रिपोर्ट्स और फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, अमेरिका ने पिछले २४ घंटों में ५० से अधिक आधुनिक लड़ाकू विमान (F-22, F-35 और F-16) पश्चिम एशिया भेजे हैं।

नौसैनिक दबदबा: दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड पहले ही इस क्षेत्र में पहुँच चुका है, जहाँ यूएसएस अब्राहम लिंकन पहले से तैनात है।

रणनीतिक उद्देश्य: सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती ईरान पर परमाणु वार्ता में दबाव बनाने और किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में 'सस्टेन्ड ऑपरेशंस' (लंबे सैन्य अभियान) चलाने की तैयारी है।

अयातुल्ला खामेनेई का पलटवार: "समुद्र की गहराई में डुबो देंगे"

अमेरिका की बढ़ती तैनाती पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला बोला। उन्होंने एक प्रतीकात्मक तस्वीर साझा की जिसमें अमेरिकी युद्धपोत को पानी में डूबा हुआ दिखाया गया है।

"अमेरिका लगातार कह रहा है कि उसने ईरान की ओर युद्धपोत भेजे हैं। बेशक युद्धपोत खतरनाक होते हैं, लेकिन उनसे भी अधिक खतरनाक वे हथियार हैं जो इन जहाजों को समुद्र की गहराई में डुबो सकते हैं।"

अयातुल्ला अली खामेनेई, सर्वोच्च नेता, ईरान

परमाणु संवर्धन पर अड़ा ईरान

खामेनेई ने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी परमाणु महत्त्वाकांक्षाओं से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने तर्क दिया कि परमाणु ऊर्जा और यूरेनियम संवर्धन अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत हर देश का अधिकार है और अमेरिका को इसमें दखल देने का कोई हक नहीं है।

जिनेवा वार्ता: कूटनीति बनाम युद्ध

भले ही ओमान की मध्यस्थता में जिनेवा में बातचीत जारी है, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट है।

प्रगति: अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर सहमति बनी है।

अवरोध: मुख्य विवाद ईरान द्वारा यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह बंद न करने और अमेरिका द्वारा परमाणु ठिकानों पर की गई पिछली कार्रवाइयों को लेकर है।

निष्कर्ष: नाजुक मोड़ पर दुनिया

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की 'पीस थ्रू स्ट्रेंथ' (शक्ति के माध्यम से शांति) की नीति और ईरान के 'प्रतिरोध के संकल्प' ने क्षेत्र को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। यदि अगले कुछ हफ्तों में जिनेवा वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँचती, तो एक 'छोटा सा मिसकैलकुलेशन' बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का कारण बन सकता है।

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