अमेरिका की घुड़की के आगे झुका सऊदी: पाकिस्तान और तुर्की से फाइटर जेट डील रद्द, F-35 के लिए लिया 'यू-टर्न'

सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ अपने रक्षा संबंधों को लेकर एक बड़ा 'यू-टर्न' लिया है। वाशिंगटन की कड़ी नाराजगी और चेतावनी के बाद रियाद ने तुर्की के 'कान' (KAAN) और पाकिस्तान के 'JF-17' फाइटर जेट खरीदने की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सऊदी अरब इन देशों से विमान खरीदता है, तो उसे दुनिया का सबसे घातक लड़ाकू विमान F-35 नहीं मिलेगा।

18 Feb 2026  |  36

रियाद/वाशिंगटन | सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ अपने रक्षा संबंधों को लेकर एक बड़ा 'यू-टर्न' लिया है। वाशिंगटन की कड़ी नाराजगी और चेतावनी के बाद रियाद ने तुर्की के 'कान' (KAAN) और पाकिस्तान के 'JF-17' फाइटर जेट खरीदने की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सऊदी अरब इन देशों से विमान खरीदता है, तो उसे दुनिया का सबसे घातक लड़ाकू विमान F-35 नहीं मिलेगा।

क्यों भड़का अमेरिका?

रक्षा विशेषज्ञों और 'मिडिल ईस्ट आई' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की नाराजगी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

बाजार पर कब्जा: तुर्की और पाकिस्तान तेजी से उन देशों (जैसे लीबिया, इंडोनेशिया) को हथियार बेच रहे हैं जो कभी अमेरिकी बाजार थे। अब वे मिडिल ईस्ट में अमेरिका के दबदबे को चुनौती दे रहे हैं।

तकनीकी सुरक्षा: पाकिस्तान का JF-17 मुख्य रूप से चीनी तकनीक पर आधारित है। अमेरिका नहीं चाहता कि उसके अत्याधुनिक F-35 का उपयोग करने वाला देश किसी ऐसे विमान का संचालन करे जिसमें चीन या अन्य प्रतिस्पर्धियों की तकनीक हो।

सैन्य बेड़े का तालमेल: पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी बिलाल सहाब के अनुसार, सऊदी के पास पहले से ही दुनिया के बेहतरीन F-15 और यूरो टाइफून विमान हैं। ऐसे में तुर्की या पाकिस्तानी विमान उनके बेड़े में तकनीकी रूप से फिट नहीं बैठते।

F-35 की 'डील' दांव पर

नवंबर 2025 में सऊदी अरब ने अमेरिका से 48 F-35 विमान खरीदने का ऐतिहासिक समझौता किया था। अमेरिकी अधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि अन्य देशों से फाइटर जेट खरीदना इस समझौते को खतरे में डाल सकता है। अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक वाले F-35 को पाने की चाहत में सऊदी अरब ने अब कदम पीछे खींच लिए हैं।

"सऊदी अरब ने अब अमेरिका को आश्वासन दिया है कि वह फिलहाल किसी अन्य मुल्क से लड़ाकू विमान नहीं खरीदेगा।" — मीडिया रिपोर्ट्स

पाकिस्तान और तुर्की को बड़ा झटका

इस फैसले से पाकिस्तान और तुर्की की उम्मीदों को करारा झटका लगा है:

इस्लामिक नाटो का सपना: माना जा रहा था कि इन सौदों के जरिए सऊदी अरब एक 'इस्लामिक नाटो' बनाने की तैयारी में था, लेकिन अमेरिकी दबाव ने इस योजना पर पानी फेर दिया है।

पाकिस्तान के साथ रक्षा संधि: पाकिस्तान ने 2025 में सऊदी अरब को 'परमाणु सुरक्षा' (Nuclear Security) की गारंटी दी थी। इस डील के टूटने से दोनों देशों के बीच भविष्य के रक्षा समझौतों पर भी असर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

सऊदी अरब का यह फैसला साफ करता है कि मिडिल ईस्ट की सुरक्षा के लिए वह आज भी पूरी तरह से अमेरिकी रक्षा तकनीक पर निर्भर रहना पसंद करता है, भले ही इसके लिए उसे अपने क्षेत्रीय सहयोगियों से दूरी बनानी पड़े।

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