यूपी की सियासत में 'चोटी विवाद': ब्रजेश पाठक के 'महापाप' वाले बयान पर शिवपाल का पलटवार, कहा- "दुख है तो इस्तीफा दें"

उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और शासन के बीच उपजा विवाद अब सरकार के भीतर और बाहर एक बड़े राजनीतिक युद्ध का रूप ले चुका है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा बटुकों की चोटी खींचे जाने को 'महापाप' बताए जाने के बाद, समाजवादी पार्टी (सपा) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर दी है।

18 Feb 2026  |  35

लखनऊ | उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और शासन के बीच उपजा विवाद अब सरकार के भीतर और बाहर एक बड़े राजनीतिक युद्ध का रूप ले चुका है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा बटुकों की चोटी खींचे जाने को 'महापाप' बताए जाने के बाद, समाजवादी पार्टी (सपा) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर दी है।

ब्रजेश पाठक का 'महापाप' वाला बयान

एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रयागराज में बटुकों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा:

"बटुकों की चोटी खींचना एक 'महापाप' है। जिन लोगों ने भी ऐसा किया है, उन्हें इसका फल भुगतना पड़ेगा। यह सब ऊपर वाले की 'खाता बही' में लिखा जा रहा है और ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।"

सपा का तंज: "पाप के भागीदार तो आप भी हैं"

ब्रजेश पाठक के इस बयान पर सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने तीखा पलटवार किया है। शिवपाल ने कहा कि अगर डिप्टी सीएम को इतना ही दुख है, तो उन्हें तुरंत पद छोड़ देना चाहिए।

इस्तीफे की मांग: शिवपाल ने कहा, "डिप्टी सीएम उसी मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं जिसकी पुलिस ने यह अपमान किया है। अगर वे इसे महापाप मानते हैं, तो उन्हें उसी मंत्रिमंडल में रहने का कोई अधिकार नहीं है।"

अखिलेश का निशाना: सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी तंज कसते हुए कहा कि अपमान शासन की ओर से हुआ है और ब्रजेश पाठक उस सरकार का अभिन्न हिस्सा हैं, इसलिए पाप के भागीदार वे भी कहलाएंगे।

सरकार के भीतर 'दो फाड़'?

इस मुद्दे पर सरकार के शीर्ष मंत्रियों के बयानों ने प्रशासनिक तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं:

केशव प्रसाद मौर्य: सबसे पहले डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सामने आकर प्रयागराज प्रशासन की गलती मानी थी और सार्वजनिक रूप से शंकराचार्य से माफी मांगी थी।

ब्रजेश पाठक: उन्होंने इसे धार्मिक दृष्टि से 'महापाप' करार दिया।

सीएम योगी आदित्यनाथ: दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख इस मामले में काफी सख्त रहा है। बजट सत्र के दौरान उन्होंने बिना नाम लिए शंकराचार्य पर निशाना साधा था, जिसके बाद से दोनों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के एक कार्यक्रम के दौरान शासन और पुलिस की सख्ती से शुरू हुआ। आरोप है कि इस दौरान पुलिस कर्मियों ने वहां मौजूद बटुकों (विद्यार्थियों) की चोटियां खींचकर उनके साथ बदसलूकी की। हिंदू धर्म में चोटी को पवित्र माना जाता है, इसलिए इस घटना ने धार्मिक और अब राजनीतिक रूप ले लिया है।

निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों और धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए 'चोटी विवाद' भाजपा के लिए अंदरूनी सिरदर्द बनता जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की 'अधार्मिक' कार्यप्रणाली बताकर भुनाने में जुटा है।

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