गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी हूं, पर राहुलवादी नहीं' : मणिशंकर अय्यर के तीखे तेवर, कांग्रेस ने झाड़ा पल्ला

अपने बेबाक और अक्सर विवादास्पद बयानों के लिए चर्चित वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर एक बार फिर अपनी ही पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहे हैं। इस बार उन्होंने खुद को वैचारिक रूप से 'गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी' बताते हुए 'राहुलवादी' होने से साफ इनकार कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने इंदिरा गांधी के आपातकाल (इमरजेंसी) के दौर पर भी तीखा प्रहार किया है।

18 Feb 2026  |  30

नई दिल्ली: अपने बेबाक और अक्सर विवादास्पद बयानों के लिए चर्चित वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर एक बार फिर अपनी ही पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहे हैं। इस बार उन्होंने खुद को वैचारिक रूप से 'गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी' बताते हुए 'राहुलवादी' होने से साफ इनकार कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने इंदिरा गांधी के आपातकाल (इमरजेंसी) के दौर पर भी तीखा प्रहार किया है।

"राहुल मुझसे 30 साल छोटे, उनके साथ काम का मौका नहीं मिला"

एक विशेष बातचीत के दौरान अय्यर ने अपनी राजनीतिक विचारधारा का वर्गीकरण करते हुए कहा कि वह राहुल गांधी की श्रेणी में फिट नहीं बैठते। उनके तर्कों का सार कुछ इस प्रकार है:

पीढ़ियों का अंतर: अय्यर ने कहा, "कोई मुझसे राहुलवादी होने की उम्मीद कैसे कर सकता है? वह लड़का मुझसे करीब 30 साल छोटा है। मुझे उनके साथ सीधे तौर पर काम करने का मौका नहीं मिला।"

नेहरू-गांधी का प्रभाव: उन्होंने बचपन की यादें साझा करते हुए बताया कि महात्मा गांधी ने उन्हें गोद में उठाया था, जिससे वे गांधीवादी बने। वहीं, उनके युवावस्था के साल जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्रित्व काल में बीते, जिससे वे नेहरूवादी विचारधारा में रचे-बसे।

राजीव गांधी के प्रति निष्ठा: उन्होंने राजीव गांधी को अपना राजनीतिक मार्गदर्शक बताया, जिन्होंने उन्हें पीएमओ (PMO) में काम करने का अवसर दिया।

इमरजेंसी और इंदिरा गांधी पर कड़ा रुख

अय्यर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद को 'इंदिरावादी' नहीं मानते। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों का हवाला देते हुए कहा कि वह इंदिरा गांधी द्वारा लोकतंत्र को तानाशाही में बदलने (इमरजेंसी) के फैसले को पूरी तरह खारिज करते हैं, चाहे वह केवल 18 महीने के लिए ही क्यों न रहा हो।

केरल की राजनीति और कांग्रेस की दूरी

अय्यर ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की प्रशंसा करते हुए भविष्यवाणी की कि वे ही अगले मुख्यमंत्री बने रहेंगे। इस बयान ने कांग्रेस के भीतर हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि राज्य में कांग्रेस (UDF) मुख्य विपक्षी दल है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया: विवाद बढ़ता देख कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक तौर पर अय्यर के बयानों से किनारा कर लिया है। पार्टी के अनुसार:

"पिछले कुछ वर्षों से मणिशंकर अय्यर का पार्टी के आधिकारिक स्टैंड से कोई लेना-देना नहीं है। वह पूरी तरह अपनी निजी हैसियत से बोल और लिख रहे हैं। केरल की जनता आगामी चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को ही सत्ता में वापस लाएगी।"

असंतोष के स्वर

अय्यर ने पार्टी नेतृत्व को नसीहत देते हुए यह भी कहा कि यदि कोई संगठन 'असहमति की आवाज' को बर्दाश्त नहीं कर सकता, तो यह उसके विनाश का संकेत है। उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब कांग्रेस वैचारिक स्पष्टता और सांगठनिक मजबूती के दौर से गुजर रही है।

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