ED बनाम ममता बनर्जी: 'जांच में दखल और साक्ष्यों से छेड़छाड़', प्रवर्तन निदेशालय के सुप्रीम कोर्ट में सनसनीखेज आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य प्रशासन पर संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखने का आरोप लगाया है। ED का दावा है कि कोलकाता में एक छापेमारी के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुँचकर जांच को बाधित किया और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में ले लिए।

18 Feb 2026  |  36

ED बनाम ममता बनर्जी: 'जांच में दखल और साक्ष्यों से छेड़छाड़', प्रवर्तन निदेशालय के सुप्रीम कोर्ट में सनसनीखेज आरोप

नई दिल्ली/कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य प्रशासन पर संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखने का आरोप लगाया है। ED का दावा है कि कोलकाता में एक छापेमारी के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुँचकर जांच को बाधित किया और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में ले लिए।

8 फरवरी की घटना: लाउडन स्ट्रीट पर हाई वोल्टेज ड्रामा

ED ने कोर्ट को बताया कि यह पूरा मामला 8 फरवरी 2026 का है, जब केंद्रीय एजेंसी की एक टीम PMLA कानून के तहत कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित एक फ्लैट में तलाशी ले रही थी। ED के अनुसार:

दस्तावेज और डिवाइस जब्त: हलफनामे में आरोप लगाया गया है कि दोपहर करीब 12:05 बजे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अचानक मौके पर पहुँचीं। अधिकारियों की अपील के बावजूद उन्होंने कथित तौर पर केस से जुड़े अहम डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए।

पुलिस की भूमिका: ED का कहना है कि कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा देने के बजाय जांच में बाधा डाली। जब ED अधिकारियों ने पहचान पत्र और सर्च वारंट दिखाए, तब भी पुलिस ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कर ली।

ED के तीन बड़े आरोप

केंद्रीय जांच एजेंसी ने बंगाल सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं:

सत्ता का दुरुपयोग: जांच को रोकने के लिए प्रभाव, शक्ति और सुरक्षा तंत्र का इस्तेमाल किया गया।

साक्ष्यों से छेड़छाड़: डिजिटल सबूतों और अहम दस्तावेजों को मुख्यमंत्री द्वारा अपने साथ ले जाना जांच को कमजोर करने की कोशिश है।

झूठे आरोप: पुलिस द्वारा ED अधिकारियों पर लगाए गए दुर्व्यवहार और अवैध प्रवेश के आरोपों को ED ने पूरी तरह बेबुनियाद और 'गलत' करार दिया है।

"राज्य में कानूनहीनता का माहौल है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे निष्पक्ष जांच के बजाय आरोपियों और जांच में बाधा डालने वालों की मदद कर रहे हैं।" — प्रवर्तन निदेशालय (सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे का अंश)

सुप्रीम कोर्ट से ED की मांग

ED ने अदालत से आग्रह किया है कि राज्य सरकार और पुलिस के दावों को खारिज किया जाए। एजेंसी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

जांच में बाधा डालने वाले अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच के लिए पूरी जिम्मेदारी CBI को सौंपी जाए।

पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष

हालांकि कोलकाता पुलिस ने पहले ही ED पर गलत तरीके से प्रवेश करने का आरोप लगाया था, लेकिन अब मुख्यमंत्री पर सीधे आरोपों के बाद बंगाल सरकार की ओर से कड़ी कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है। तृणमूल कांग्रेस इसे अक्सर 'राजनीतिक प्रतिशोध' करार देती रही है।

मुख्य बिंदु एक नज़र में:

मामला: PMLA के तहत 8 फरवरी 2026 को हुई छापेमारी।

आरोप: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच में व्यक्तिगत हस्तक्षेप किया।

तर्क: डिजिटल डिवाइस और दस्तावेजों से छेड़छाड़ की गई।

मांग: मामले की जांच CBI से कराने की अपील।

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