सावधान! काशी में नाव पर रील या सेल्फी का शौक पड़ेगा भारी; प्रशासन ने जारी की सख्त गाइडलाइन

मोक्ष की नगरी काशी आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए अब गंगा की लहरों पर सैर करना केवल आनंददायक ही नहीं, बल्कि अधिक अनुशासित भी होने वाला है। वाराणसी जिला प्रशासन ने गंगा में नौकायन के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नई और बेहद सख्त गाइडलाइन जारी की है। अब नियमों का उल्लंघन करने पर न केवल भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

19 Feb 2026  |  23

वाराणसी: मोक्ष की नगरी काशी आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए अब गंगा की लहरों पर सैर करना केवल आनंददायक ही नहीं, बल्कि अधिक अनुशासित भी होने वाला है। वाराणसी जिला प्रशासन ने गंगा में नौकायन के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नई और बेहद सख्त गाइडलाइन जारी की है। अब नियमों का उल्लंघन करने पर न केवल भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

रील और सेल्फी पर पूर्ण प्रतिबंध

अक्सर देखा गया है कि युवा चलती नाव में खड़े होकर सेल्फी लेते हैं या सोशल मीडिया के लिए रील बनाते हैं, जिससे नाव का संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। प्रशासन ने अब चलती नाव में रील बनाने और खड़े होकर सेल्फी लेने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसकी मुख्य जिम्मेदारी नाविक (नाव संचालक) की होगी।

सुरक्षा के नए मानक: लाइफ जैकेट अनिवार्य

हाल ही में हुई कुछ दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए प्रशासन ने सुरक्षा मानकों को कड़ा किया है:

लाइफ जैकेट: बिना लाइफ जैकेट पहने किसी भी पर्यटक को नाव पर बैठने की अनुमति नहीं होगी।

ट्रैफिक रूट: अस्सी घाट से नमो घाट जाने वाली नावें रेत (बालू) की ओर से चलेंगी, जबकि वापसी (नमो घाट से अस्सी) में नावें घाटों के किनारे से होकर गुजरेंगी।

क्षमता और व्यवहार: क्षमता से अधिक सवारी बैठाना अपराध माना जाएगा। साथ ही, नाविकों के लिए नशे में नाव चलाना और पर्यटकों से अभद्रता करना प्रतिबंधित कर दिया गया है।

लापरवाही पर 'जेल और जुर्माना'

नियमों का उल्लंघन करने वाले नाविकों और संचालकों के खिलाफ प्रशासन भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 282 के तहत कठोर कार्रवाई करेगा।

सजा का प्रावधान: > * 6 महीने की जेल

10,000 रुपये का जुर्माना

अथवा दोनों सजाएं एक साथ।

पारदर्शिता और पर्यावरण का रखा गया ध्यान

प्रशासन ने न केवल सुरक्षा बल्कि पारदर्शिता और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया है। अब केवल पंजीकृत और प्रदूषण रहित मोटर बोट्स को ही संचालन की अनुमति होगी। इसके अलावा, पर्यटकों से तय किराए से अधिक वसूली करना भी दंडनीय होगा। नावों की गति सीमा भी निर्धारित कर दी गई है ताकि घाटों और अन्य नौकाओं को कोई क्षति न पहुंचे।

निष्कर्ष: प्रशासन का यह कदम काशी आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और गंगा में यातायात को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब बाबा विश्वनाथ के भक्तों को गंगा की लहरों पर आस्था के साथ-साथ अनुशासन का भी पालन करना होगा।

ट्रेंडिंग