एआई बनाम कलाकार: "300 करोड़ की फिल्म बच्चा भी बना लेगा", शेखर कपूर के बयान ने फिल्म जगत में छेड़ी बहस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक ऐसी क्रांति है, जहाँ एक दिन एआई कलाकार न कभी थकेंगे, न बीमार होंगे और न ही बुढ़ापे का शिकार होंगे।" 'मिस्टर इंडिया' फेम निर्देशक शेखर कपूर का यह बयान सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान उन्होंने आगाह किया कि भविष्य में एआई की मदद से भारी-भरकम बजट वाली फिल्में बेहद मामूली खर्च में तैयार हो सकेंगी, जो पारंपरिक फिल्म निर्माण की नींव हिला सकती हैं।
19 Feb 2026
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नई दिल्ली/मुंबई: "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक ऐसी क्रांति है, जहाँ एक दिन एआई कलाकार न कभी थकेंगे, न बीमार होंगे और न ही बुढ़ापे का शिकार होंगे।" 'मिस्टर इंडिया' फेम निर्देशक शेखर कपूर का यह बयान सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान उन्होंने आगाह किया कि भविष्य में एआई की मदद से भारी-भरकम बजट वाली फिल्में बेहद मामूली खर्च में तैयार हो सकेंगी, जो पारंपरिक फिल्म निर्माण की नींव हिला सकती हैं।
बॉलीवुड दिग्गजों की चिंता और उम्मीद
एआई को लेकर भारतीय सिनेमा के महानायक से लेकर युवा पीढ़ी के सितारों तक की राय बंटी हुई है:
अमिताभ बच्चन: केबीसी 17 के मंच पर 'बिग बी' ने चुटकी लेते हुए कहा कि एआई इंसानों का विकल्प बनता जा रहा है और डर है कि कहीं यह उन्हें भी रिप्लेस न कर दे। हालांकि, उन्होंने इसके सकारात्मक और मानवीय सदुपयोग की वकालत भी की।
अभिषेक बच्चन: जूनियर बी ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि हर कलाकार को एआई से डरना चाहिए। हालांकि, वे मानते हैं कि वीएफएक्स (VFX), सीजीआई और एनिमेशन जैसे प्रोडक्शन कार्यों में यह हॉलीवुड जैसी गुणवत्ता लाने में मददगार होगा।
नंदिता दास: अभिनेत्री और निर्देशक नंदिता दास का मानना है कि एआई को ठीक से समझने की जरूरत है ताकि फिल्म निर्माण के समय को कम किया जा सके और दर्शकों को कुछ नया पेश किया जा सके।
भारतीय फिल्मों में एआई के 'चमत्कार': रीयल लाइफ उदाहरण
भारतीय सिनेमा में एआई का इस्तेमाल अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि हकीकत बन चुका है:
उम्र को मात (De-aging): साल 2025 में आई मलयालम फिल्म 'रेखाचित्रम' में 73 वर्षीय ममूटी को एआई की मदद से 30 साल का युवा दिखाया गया। ऐसा ही प्रयोग फिल्म 'वेपन' में 71 वर्षीय अभिनेता सत्यराज पर भी किया गया।
कहानी का कायाकल्प: साल 2013 की फिल्म 'रांझणा' को जब 2025 में तमिल में रिलीज किया गया, तो एआई के जरिए इसके दुखद अंत को 'हैप्पी एंडिंग' में बदल दिया गया।
एआई निर्मित फिल्में: विवेक आंचलिया की 'नैशा' पूरी तरह एआई तकनीक पर आधारित फिल्म के रूप में उभरी है।
हॉलीवुड का कड़ा रुख: "रोबोट हमारे सपने नहीं देख सकते"
हॉलीवुड में एआई के खिलाफ आक्रोश बॉलीवुड से कहीं अधिक मुखर है। स्कारलेट जोहानसन, केट ब्लैंचेट और निकोलस केज जैसे सितारों ने एआई को रचनात्मकता के लिए 'गंभीर खतरा' बताया है।
"हमारे सपने हम ही देख सकते हैं, उन्हें रोबोट को मत देखने दीजिए। एआई का उपयोग केवल प्रोडक्शन तक सीमित रहे, अभिनय और गायन वास्तविक इंसानों को ही करने दें।" — निकोलस केज
निष्कर्ष: तकनीक और भावना का संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई लोकेशन खोजने और स्पेशल इफेक्ट्स में तो 'जादू' कर सकता है, लेकिन मानव मन की भावनात्मक गहराई (Emotional Depth) को पकड़ना मशीन के बस की बात नहीं है। अंततः, कला की आत्मा मानवीय संवेदनाओं में ही बसती है, जिसे कोई एल्गोरिदम रिप्लेस नहीं कर सकता।