उत्तर प्रदेश विधानसभा में संग्राम: मंत्री संजय निषाद और सपा विधायकों के बीच तीखी झड़प, पेपर छीनने की कोशिश और भारी हंगामा
: उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र बुधवार को उस समय अखाड़े में तब्दील हो गया, जब मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद के भाषण के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला। मामला इतना बढ़ गया कि समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक वेल तक आ गए, नारेबाजी की और मंत्री के हाथ से उनके भाषण की प्रतियां छीनने का प्रयास किया।
19 Feb 2026
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र बुधवार को उस समय अखाड़े में तब्दील हो गया, जब मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद के भाषण के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला। मामला इतना बढ़ गया कि समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक वेल तक आ गए, नारेबाजी की और मंत्री के हाथ से उनके भाषण की प्रतियां छीनने का प्रयास किया।
विवाद की जड़: "बेईमान" और "हक हड़पने" के आरोप
बजट पर चर्चा के दौरान डॉ. संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा नेताओं को "बेईमान" करार देते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) के अधिकारों और फायदों का बड़ा हिस्सा खुद हड़प लिया है।
इशारों की राजनीति: हालांकि मंत्री ने किसी विशेष जाति का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा सीधे तौर पर यादव समुदाय की ओर माना गया, जो सपा का पारंपरिक कोर वोटर है। इस टिप्पणी ने विपक्षी खेमे में आग लगा दी।
सदन में 'महारथी' भिड़े: "क्या मछलियां उर्दू पढ़ती हैं?"
संजय निषाद ने तीखे तेवर अपनाते हुए सपा को मछुआरा समाज के लिए 'मगरमच्छ' बताया। उन्होंने एक विवादित सवाल उठाते हुए कहा:
"मत्स्य विभाग के पदों को उर्दू अनुभाग में बदलने का क्या तर्क था? क्या मछलियां अब उर्दू पढ़ती हैं?"
इस बयान के बाद सदन में शोर-शराबा चरम पर पहुँच गया। सपा विधायकों और मंत्री के बीच हाथापाई जैसी नौबत आ गई।
जातिगत शब्द पर बवाल और 'धरने' की चेतावनी
हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा निषाद समुदाय के संदर्भ में एक कथित 'जातिगत शब्द' के इस्तेमाल पर विवाद और गहरा गया।
निषाद की चेतावनी: डॉ. संजय निषाद ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और माफी की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि माता प्रसाद पांडेय ने माफी नहीं मांगी, तो वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे और धरने पर बैठेंगे।
स्पीकर की सख्ती और संसदीय कार्य मंत्री की शिकायत
हालात बेकाबू होते देख विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने:
दोनों पक्षों को मर्यादा में रहने की चेतावनी दी।
सदन की कार्यवाही से आपत्तिजनक शब्दों को हटाने के निर्देश दिए।
मंत्री संजय निषाद को शांत रहने के लिए फटकार भी लगाई।
वहीं, संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने इस घटना को "मंत्री पर हमले की कोशिश" करार देते हुए पीठ से आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।