शांति की नई वैश्विक पहल: ट्रंप के 'पीस बोर्ड' का आगाज़, चीन और रूस को भी साथ लाने की तैयारी

वैश्विक संघर्षों को सुलझाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक नया आयाम देने की दिशा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप द्वारा गठित 'शांति बोर्ड' की पहली औपचारिक बैठक वाशिंगटन डीसी में संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य आकर्षण राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा रूस और चीन को इस बोर्ड में शामिल करने का खुला प्रस्ताव रहा।

20 Feb 2026  |  25

वाशिंगटन डीसी: वैश्विक संघर्षों को सुलझाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक नया आयाम देने की दिशा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप द्वारा गठित 'शांति बोर्ड'  की पहली औपचारिक बैठक वाशिंगटन डीसी में संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य आकर्षण राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा रूस और चीन को इस बोर्ड में शामिल करने का खुला प्रस्ताव रहा।

गाजा का पुनर्निर्माण और 10 अरब डॉलर का कोष

बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि इस बोर्ड का प्राथमिक उद्देश्य गाजा पट्टी में युद्धविराम के बाद पुनर्निर्माण और वहां स्थायी शांति स्थापित करना होगा। इस मिशन की गंभीरता को रेखांकित करते हुए उन्होंने बोर्ड के कार्यों के लिए 10 अरब डॉलर की प्रारंभिक वित्तीय सहायता देने का ऐलान भी किया।

चीन और रूस को न्योता: नए वैश्विक समीकरण की आहट

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे शांति प्रयासों में चीन और रूस की भागीदारी को अनिवार्य मानते हैं। उन्होंने कहा:

"मेरे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बहुत प्रगाढ़ संबंध हैं और मैं अप्रैल में चीन का दौरा करने वाला हूँ। हमने दोनों देशों को न्योता भेज दिया है और हमें उनके सकारात्मक निर्णय की प्रतीक्षा है।"

प्रमुख देशों की भागीदारी और अनुपस्थिति

इस उद्घाटन बैठक में दुनिया के 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। हालाँकि, कुछ महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ भी देखने को मिले:

अनुपस्थिति: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन इस पहली बैठक में शामिल नहीं हुए।

यूरोपीय संघ: रिपोर्ट्स के अनुसार, ईयू ने फिलहाल बोर्ड में सीट न लेने का विकल्प चुना है।

भारत का रुख: भारत को भी इस बोर्ड के लिए आमंत्रित किया गया है, लेकिन नई दिल्ली ने अभी इस पर अपना अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

संयुक्त राष्ट्र पर 'नजर' और सुधार का संकल्प

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि यह शांति बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) के कामकाज की निगरानी भी करेगा। उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका चाहता है कि यूएन अपनी भूमिका सही ढंग से निभाए। इसके साथ ही उन्होंने यूएन की स्थिति मजबूत करने के लिए आर्थिक मदद जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

बोर्ड का नेतृत्व: अनुभवी चेहरों पर भरोसा

शांति बोर्ड की कमान ट्रंप के कुछ सबसे भरोसेमंद और अनुभवी हाथों में है। इसके शुरुआती कार्यकारी सदस्यों में शामिल हैं:

जेरेड कुश्नर (ट्रंप के दामाद और अब्राहम एकॉर्ड के शिल्पकार)

मार्को रुबियो (अमेरिकी विदेश मंत्री)

स्टीव विटकॉफ (विशेष दूत)

टोनी ब्लेयर (ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री)

यह बोर्ड सितंबर में प्रस्तावित 20 सूत्री गाजा युद्धविराम योजना के दूसरे चरण के हिस्से के रूप में कार्य करेगा, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संघर्ष समाधान तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाना है।

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