हिंद महासागर में भारत का 'महाशक्ति' शंखनाद: 70 देशों के साथ 'मिलन 2026' का आगाज़

ऑपरेशन सिंदूर' की शानदार सफलता के बाद, भारतीय नौसेना ने अब हिंद महासागर की लहरों पर अपनी कूटनीतिक और रणनीतिक धाक जमानी शुरू कर दी है। द्विवार्षिक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'मिलन 2026' का आगाज हो चुका है, जो न केवल भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि वैश्विक मंच पर नई दिल्ली की बढ़ती स्वीकार्यता का भी प्रमाण है।

20 Feb 2026  |  24

नई दिल्ली/विशाखापट्टनम: 'ऑपरेशन सिंदूर' की शानदार सफलता के बाद, भारतीय नौसेना ने अब हिंद महासागर की लहरों पर अपनी कूटनीतिक और रणनीतिक धाक जमानी शुरू कर दी है। द्विवार्षिक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'मिलन 2026' का आगाज हो चुका है, जो न केवल भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि वैश्विक मंच पर नई दिल्ली की बढ़ती स्वीकार्यता का भी प्रमाण है।

70 देश, एक लक्ष्य: सुरक्षित समुद्री सीमाएँ

19 फरवरी से 25 फरवरी तक चलने वाले इस महा-अभ्यास में दुनिया के 70 से अधिक देश शिरकत कर रहे हैं, जिनमें से 20 देशों ने अपने अत्याधुनिक जंगी जहाज भेजे हैं। यह अभ्यास दो महत्वपूर्ण चरणों में विभाजित है:

हार्बर फेज: जहाँ रणनीतिक चर्चा, वॉर सिमुलेशन और पेशेवर आदान-प्रदान के जरिए आपसी तालमेल बिठाया जा रहा है।

सी फेज: इसमें समुद्र की लहरों के बीच लाइव ड्रिल, एंटी-सबमरीन ऑपरेशन और फॉर्मेशन सेलिंग जैसी जटिल युद्धाभ्यासों को अंजाम दिया जाएगा।

भारतीय नौसेना के 'त्रिशूल' ने बिखेरी चमक

इस अभ्यास में भारत अपनी स्वदेशी तकनीक और मारक क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। आकर्षण का केंद्र बने प्रमुख युद्धपोत और विमान इस प्रकार हैं:

INS विशाखापट्टनम: ब्रह्मोस मिसाइल से लैस दुनिया का सबसे आधुनिक स्टील्थ डेस्ट्रॉयर।

INS शिवालिक: पनडुब्बी रोधी क्षमता वाला मल्टी-रोल स्टील्थ फ्रिगेट।

Boeing P-8I: लंबी दूरी की समुद्री निगरानी का बेताज बादशाह।

MH-60R हेलीकॉप्टर: विशेष बलों की स्लिथरिंग और एम्फीबियस डेमो के साथ नौसेना की कार्यकुशलता का प्रदर्शन।

रणनीतिक संदेश: चीन और पाकिस्तान की अनुपस्थिति

'मिलन 2026' से पाकिस्तान, चीन और तुर्किए की अनुपस्थिति ने वैश्विक गलियारों में एक बड़ा कूटनीतिक संदेश दिया है। बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी के बीच, भारत ने रूस, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे विरोधाभासी हितों वाले देशों को एक मंच पर लाकर यह साबित कर दिया है कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का वास्तविक सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider) है।

"भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन सामरिक संतुलन और सुरक्षा के मामले में हमारी तैयारी अभेद्य है। यह अभ्यास वैश्विक विश्वास का प्रतीक है।"

बंगाल की खाड़ी: वैश्विक व्यापार का हृदय

मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाला यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन है। यहाँ आयोजित ड्रिल से भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी पूर्वी समुद्री सीमा पर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

'मिलन 2026' केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि 'वसुधैव कुटुंबकम' के भाव के साथ समुद्र में भारत के बढ़ते कद की एक सशक्त गर्जना है।

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