चुगली की तो ढीली होगी जेब: छत्तीसगढ़ के मेढ़की गाँव का अनोखा फैसला, 5,001 रुपये का लगेगा जुर्माना

बदलते दौर में जहाँ सोशल मीडिया और कानाफूसी (गॉसिप) के कारण गाँवों का आपसी भाईचारा कम हो रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के मेढ़की गाँव ने एक मिसाल पेश की है। ग्रामीणों ने सामूहिक बैठक कर निर्णय लिया है कि अब गाँव में 'चुगली' करने वालों और 'नशे में हंगामा' करने वालों की खैर नहीं होगी।

20 Feb 2026  |  17

बालोद | बदलते दौर में जहाँ सोशल मीडिया और कानाफूसी (गॉसिप) के कारण गाँवों का आपसी भाईचारा कम हो रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के मेढ़की गाँव ने एक मिसाल पेश की है। ग्रामीणों ने सामूहिक बैठक कर निर्णय लिया है कि अब गाँव में 'चुगली' करने वालों और 'नशे में हंगामा' करने वालों की खैर नहीं होगी।

क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ समय से छोटी-छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर बताने और दूसरों की बुराई करने की प्रवृत्ति बढ़ गई थी। इससे पड़ोसियों के बीच अविश्वास और तनाव का माहौल पैदा हो रहा था। कई बार तो मामूली कानाफूसी बड़े विवाद का रूप ले लेती थी।

गाँव की पंचायत के मुख्य निर्णय:

चुगली पर लगाम: यदि कोई ग्रामीण किसी दूसरे के खिलाफ भ्रामक बातें फैलाता या चुगली करता पाया गया, तो उसे 5,001 रुपये का जुर्माना भरना होगा।

शराब और हंगामे पर पाबंदी: किसी भी सामाजिक या धार्मिक भोज में शराब पीकर पहुंचने और शांति भंग करने पर भी 5,001 रुपये का दंड तय किया गया है।

"यह किसी के खिलाफ नहीं, सबके हित में है"

गाँव के प्रबुद्ध नागरिक धनराज साहू का कहना है कि यह निर्णय किसी व्यक्ति विशेष को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि पूरे गाँव में सुख-शांति सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। ग्रामीणों का मानना है कि आर्थिक दंड के डर से लोग अपनी जुबान पर लगाम रखेंगे और जिम्मेदारी से व्यवहार करेंगे।

बुजुर्गों का समर्थन: गाँव के बुजुर्ग होरीलाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नशे और चुगली ने पुराने समय के उस गहरे आपसी संवाद को खत्म कर दिया था। यह नियम गाँव की एकता को वापस लाने में मील का पत्थर साबित होगा।

मेढ़की गाँव का 'अनुशासन चार्ट'

अपराधनिर्धारित जुर्मानालक्ष्य
चुगली/भ्रामक बातें फैलाना₹ 5,001आपसी विश्वास और सौहार्द बढ़ाना
नशे में सामाजिक भोज में हंगामा₹ 5,001सार्वजनिक गरिमा और शांति बनाए रखना

सामाजिक संदेश

मेढ़की गाँव का यह कदम उन सभी समुदायों के लिए एक सबक है जहाँ आपसी रंजिशें सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर रही हैं। ग्रामीणों को पूरी उम्मीद है कि इस 'सॉफ्ट पुलिसिंग' से गाँव में फिर से वही पुराना भाईचारा और खुशहाली लौटेगी।

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