बांग्लादेश में 'यूनुस युग' के फैसलों पर फिरेगा पानी? तारिक रहमान सरकार रद्द कर सकती है 100 से अधिक अध्यादेश
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही पिछली अंतरिम सरकार के निर्णयों को पलटने की कवायद तेज हो गई है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान कुल 132 अध्यादेश जारी किए थे। संवैधानिक नियमों के अनुसार, नई संसद के गठन के बाद इन अध्यादेशों को 25 दिनों के भीतर पास कराना अनिवार्य है, अन्यथा वे स्वतः ही रद्द हो जाएंगे।
20 Feb 2026
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ढाका | बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही पिछली अंतरिम सरकार के निर्णयों को पलटने की कवायद तेज हो गई है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान कुल 132 अध्यादेश जारी किए थे। संवैधानिक नियमों के अनुसार, नई संसद के गठन के बाद इन अध्यादेशों को 25 दिनों के भीतर पास कराना अनिवार्य है, अन्यथा वे स्वतः ही रद्द हो जाएंगे।
संसद में 'अग्निपरीक्षा' और बीएनपी की रणनीति
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार इन 132 अध्यादेशों की बारीकी से समीक्षा कर रही है। खबरों के मुताबिक, सरकार केवल कुछ ही चुनिंदा अध्यादेशों को संसद में पेश करेगी। इसका सीधा मतलब है कि यूनुस सरकार द्वारा लिए गए अधिकांश बड़े फैसले इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे।
मुख्य रूप से प्रभावित होने वाले क्षेत्र:
संविधान सुधार: सुधारों से जुड़े अधिकांश अध्यादेश रद्द किए जा सकते हैं।
विवादास्पद कानून: वे सभी अध्यादेश जो भविष्य में राजनीतिक विवाद का कारण बन सकते हैं, उन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
शेख हसीना और आवामी लीग: शेख हसीना की पार्टी 'आवामी लीग' पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जा सकता है, क्योंकि पार्टी ने जिलों में फिर से राजनीतिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं।
'जुलाई चार्टर' पर गहराया संकट
यूनुस सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी पहल 'जुलाई चार्टर' थी, जो संविधान में आमूलचूल परिवर्तन का प्रस्ताव था। बीएनपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इसे मौजूदा स्वरूप में स्वीकार नहीं करेगी।
जुलाई चार्टर के प्रमुख प्रस्ताव (जिन पर खतरा है):
कार्यकाल की सीमा: कोई भी व्यक्ति 2 बार से अधिक या 10 वर्ष से ज्यादा प्रधानमंत्री नहीं रह सकता।
न्यायिक नियुक्तियां: जजों की नियुक्ति का अधिकार प्रधानमंत्री से छीनने का प्रस्ताव।
शपथ ग्रहण: बीएनपी सांसदों ने संविधान सुधार सदस्य के रूप में शपथ लेने से पहले ही इनकार कर दिया है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार की आहट
यूनुस सरकार की विदाई के साथ ही भारत और बांग्लादेश के बीच जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। नई दिल्ली ने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए वीजा सेवाएं फिर से शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। गौरतलब है कि 17 दिसंबर 2025 को सुरक्षा कारणों से इन सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था।
प्रमुख घटनाक्रम: एक नजर में
| विषय | स्थिति | प्रभाव |
|---|---|---|
| कुल अध्यादेश | 132 | 25 दिन में पास न होने पर रद्द होंगे। |
| जुलाई चार्टर | बीएनपी द्वारा खारिज | संविधान सुधार प्रक्रिया रुक सकती है। |
| आवामी लीग | सक्रियता बढ़ी | मुख्य विपक्षी दल के रूप में वापसी की संभावना। |
| भारतीय वीजा | सेवा पुनः बहाल | आम नागरिकों और व्यापारियों को बड़ी राहत। |
निष्कर्ष: संसद ही सर्वोपरि
बांग्लादेश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन चौधरी के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि अब देश की दिशा का फैसला संसद की चौखट पर होगा, न कि अंतरिम सरकार के पुराने अध्यादेशों से। तारिक रहमान सरकार का यह रुख संकेत देता है कि वे यूनुस सरकार के 'कठोर सुधारों' के बजाय पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था को प्राथमिकता दे रहे हैं।