ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी कोर्ट के 'हथौड़े' से भारत में सियासी उबाल, कांग्रेस ने व्यापार समझौते को बताया 'आत्मघाती'

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को 'अवैध' करार देने के फैसले ने भारत की घरेलू राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "राजनीतिक दबाव और जल्दबाजी" में अमेरिका के साथ एक ऐसा एकतरफा व्यापार समझौता किया है, जो देश के आर्थिक हितों और संप्रभुता के खिलाफ है।

21 Feb 2026  |  18

नई दिल्ली | अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को 'अवैध' करार देने के फैसले ने भारत की घरेलू राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "राजनीतिक दबाव और जल्दबाजी" में अमेरिका के साथ एक ऐसा एकतरफा व्यापार समझौता किया है, जो देश के आर्थिक हितों और संप्रभुता के खिलाफ है।

कांग्रेस का तीखा प्रहार: "जल्दबाजी बनी जी का जंजाल"

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार की व्यापार नीति पर सवाल उठाते हुए इसे 'ओरडील' (कठिन परीक्षा) करार दिया है। कांग्रेस के आरोपों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

अचानक घोषणा पर सवाल: जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 2 फरवरी 2026 की रात अचानक इस समझौते की घोषणा क्यों की गई? उन्होंने संकेत दिया कि लोकसभा की किसी विशेष स्थिति से ध्यान भटकाने के लिए व्हाइट हाउस से यह घोषणा करवाई गई।

किसानों का अहित: कांग्रेस का दावा है कि इस समझौते की शर्तें भारतीय किसानों के लिए नुकसानदेह हैं और इससे देश के कृषि बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तर्क: विपक्ष का कहना है कि यदि भारत सरकार थोड़ा इंतजार करती और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती, तो भारत को 18% जैसे भारी टैरिफ को स्वीकार करने की मजबूरी नहीं होती।

ट्रंप के दावे और '18% टैरिफ' का पेंच

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप के कड़े तेवर बरकरार हैं। उन्होंने साफ किया है कि भारत के साथ हुई डील पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

समझौते की वर्तमान स्थिति: | बिंदु | विवरण | | :--- | :--- | | पिछला शुल्क | रूस से तेल खरीद के कारण अमेरिका ने भारत पर 25% दंडात्मक टैरिफ लगाया था। | | नया शुल्क (Deal) | अंतरिम व्यापार ढांचे के तहत इसे घटाकर 18% (रेसिप्रोकल टैरिफ) किया गया है। | | ट्रंप का दावा | "भारत टैरिफ देगा और हम नहीं देंगे।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनके दबाव में भारत ने रूस से तेल खरीद कम की है। |

कूटनीतिक दबाव या कूटनीतिक जीत?

जहाँ एक ओर राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि उन्होंने टैरिफ के जरिए भारत-पाकिस्तान संघर्ष को भी रोका है, वहीं कांग्रेस इसे केवल "राजनीतिक बयानबाजी" मानती है। कांग्रेस ने अमेरिकी न्यायपालिका की सराहना करते हुए कहा कि वहां के संस्थानों ने राष्ट्रपति की मनमानी पर रोक लगाई, जबकि भारत सरकार ने दबाव में आकर "देश को एकतरफा डील में फंसा दिया।"

भविष्य की राह

वर्तमान में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक गर्माया हुआ है। आने वाले दिनों में विपक्ष इस समझौते की शर्तों को सार्वजनिक करने और 'रेसिप्रोकल टैरिफ' के नाम पर भारतीय निर्यातकों पर पड़ने वाले बोझ को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

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