UGC के नए नियमों पर मचा बवाल: जगद्गुरु रामभद्राचार्य की 'गृहयुद्ध' वाली चेतावनी, सवर्णों का सड़कों पर उग्र प्रदर्शन

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देश में विवाद गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बस्ती और राजधानी लखनऊ से विरोध के स्वर इतने तीव्र हो गए हैं कि अब इसमें आध्यात्मिक गुरुओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक शामिल हो गए हैं। जहाँ जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इसे 'काला कानून' करार देते हुए सरकार को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है, वहीं लखनऊ की सड़कों पर भारी जनसैलाब इस नीति के खिलाफ उतर आया है।

21 Feb 2026  |  18

बस्ती/लखनऊ: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देश में विवाद गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बस्ती और राजधानी लखनऊ से विरोध के स्वर इतने तीव्र हो गए हैं कि अब इसमें आध्यात्मिक गुरुओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक शामिल हो गए हैं। जहाँ जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इसे 'काला कानून' करार देते हुए सरकार को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है, वहीं लखनऊ की सड़कों पर भारी जनसैलाब इस नीति के खिलाफ उतर आया है।

"जब तक मैं पद पर हूँ, यह कानून लागू नहीं होने दूँगा" – रामभद्राचार्य

बस्ती जिले में आयोजित एक रामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य अपने चिरपरिचित बेबाक अंदाज में नजर आए। उन्होंने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए पूछा कि आखिर इन नए नियमों की आवश्यकता ही क्या थी?

जगद्गुरु के संबोधन के मुख्य बिंदु:

गृहयुद्ध की चेतावनी: उन्होंने सचेत किया कि यदि सरकार ने इस विवादास्पद कानून को तुरंत वापस नहीं लिया, तो देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

धर्माचार्य की शक्ति: रामभद्राचार्य ने दोटूक कहा, "जब तक मैं धर्माचार्य के पद पर आसीन हूँ, इस भेदभावपूर्ण कानून को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दूँगा।"

जातिवाद पर प्रहार: उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण कभी जातिवादी नहीं रहा। उन्होंने वशिष्ठ और निषाद राज के संबंधों का उदाहरण देते हुए समाज को एकजुट होने का संदेश दिया। साथ ही, उन्होंने बस्ती का नाम बदलकर 'वशिष्ठ नगर' करने की मांग भी दोहराई।

लखनऊ की सड़कों पर संग्राम: पूर्व SDM अलंकार अग्निहोत्री भी शामिल

राजधानी लखनऊ का परिवर्तन चौक शनिवार को विरोध का केंद्र बन गया। 'सवर्ण मोर्चा' के बैनर तले सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने UGC के नए नियमों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस प्रदर्शन की सबसे खास बात हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देने वाले SDM अलंकार अग्निहोत्री की मौजूदगी रही।

मौन विरोध: पूर्व SDM ने मीडिया से बात तो नहीं की, लेकिन हाथों में तख्ती लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

भारी पुलिस बल तैनात: परिवर्तन चौक से गांधी प्रतिमा तक उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। प्रदर्शनकारी इसे "काला कानून" बताते हुए वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

क्या है विवाद की जड़?

विरोध कर रहे संगठनों और विद्वानों का तर्क है कि UGC के नए नियम समाज में विभाजन पैदा करने वाले और भेदभावपूर्ण हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये नियम शैक्षणिक संस्थानों की निष्पक्षता को प्रभावित करेंगे।

"जो भगवान राम का है, वह सबका है। समाज में भेदभाव पैदा करने वाले नियमों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।" — जगद्गुरु रामभद्राचार्य

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