"विरासत बचाने के लिए मातृभाषा अनिवार्य": त्रिपुरा CM माणिक साहा ने की अमित शाह के आह्वान की पुष्टि

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने शनिवार को 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' के अवसर पर अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अपील की है कि वे घर पर बच्चों के साथ अपनी मातृभाषा में ही संवाद करें।

21 Feb 2026  |  20

अगरतला | शनिवार त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने शनिवार को 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' के अवसर पर अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अपील की है कि वे घर पर बच्चों के साथ अपनी मातृभाषा में ही संवाद करें।

"मातृभाषा से कोई समझौता नहीं"

अगरतला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सीएम साहा ने स्पष्ट किया कि किसी भी अन्य भाषा को सीखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन मातृभाषा का स्थान सदैव सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा:

"जैसा कि गृह मंत्री अमित शाह जी ने कहा है, हमें सबसे पहले अपनी मातृभाषा में बात करनी चाहिए। आप हिंदी सीखें, अंग्रेजी सीखें या कोई और भाषा, इसमें कोई हर्ज नहीं है। लेकिन अपनी पहचान और परंपरा को जीवित रखने के लिए मातृभाषा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।"

अमित शाह के संदेश का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा असम में दिए गए उस संबोधन को याद किया, जिसमें उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर दिया था। शाह ने चेतावनी दी थी कि यदि हम घर पर बच्चों से अपनी भाषा में बात नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ी अपनी साहित्य, इतिहास और गौरवशाली संस्कृति से पूरी तरह कट जाएगी।

हिंदी और क्षेत्रीय भाषाएँ: 'एक ही माँ की संतानें'

रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री ने भाषाओं के बीच होने वाले विवादों को भी सिरे से खारिज किया। उनके संबोधन के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

सहोदर भाषाएँ: हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएँ एक ही माँ (भारतीय संस्कृति) की बेटियाँ हैं, इसलिए उनके बीच कोई प्रतिस्पर्धा या विवाद नहीं हो सकता।

परस्पर मजबूती: जब हिंदी को बढ़ावा मिलता है, तो देश की अन्य सभी क्षेत्रीय भाषाएँ भी स्वतः ही सशक्त होती हैं।

सांस्कृतिक जुड़ाव: मातृभाषा ही वह सेतु है जो बच्चों को उनकी परंपराओं से जोड़े रखती है।

निष्कर्ष: मुख्य संदेश

प्राथमिकताभाषा का प्रकारप्रभाव
प्रथममातृभाषासंस्कृति और परंपरा का संरक्षण
द्वितीयअन्य भाषाएँ (हिंदी/अंग्रेजी)ज्ञान का विस्तार और संवाद

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