बंगाल में सियासी उलटफेर: अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले प्रतिकुर रहमान TMC में शामिल, कहा– "पिक्चर अभी बाकी है"
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कद्दावर युवा नेता और राज्य समिति के सदस्य प्रतिकुर रहमान शनिवार को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हो गए। दक्षिण 24 परगना के अम्ताला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की उपस्थिति में पार्टी का झंडा थामा।
21 Feb 2026
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कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कद्दावर युवा नेता और राज्य समिति के सदस्य प्रतिकुर रहमान शनिवार को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हो गए। दक्षिण 24 परगना के अम्ताला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की उपस्थिति में पार्टी का झंडा थामा।
दिलचस्प बात यह है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रतिकुर रहमान ने डायमंड हार्बर सीट से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ ही चुनाव लड़ा था। टीएमसी का दामन थामते ही उन्होंने आक्रामक अंदाज में कहा, "यह तो केवल ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।"
CPIM नेतृत्व पर 'भाई-भतीजावाद' का आरोप
रहमान ने 16 फरवरी को माकपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। पार्टी छोड़ने के पीछे उन्होंने नेतृत्व की कार्यशैली और रणनीतियों पर गंभीर सवाल उठाए।
सीमित दायरा: उन्होंने आरोप लगाया कि माकपा नेतृत्व में कुछ व्यक्तियों के 'भाई-भतीजावाद' ने उन्हें संगठन के भीतर सीमित कर दिया था।
वैचारिक मतभेद: प्रतिकुर के अनुसार, उनसे अपेक्षा की जाती थी कि वे बिना सवाल किए वफादार बने रहें। जब उन्होंने पार्टी के सिद्धांतों पर सवाल उठाए, तो उन्हें किनारे कर दिया गया।
ममता का 'अनंत' दांव: भाजपा सांसद को बंगविभूषण
एक तरफ जहाँ टीएमसी सांगठनिक विस्तार कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाषाई और सांस्कृतिक राजनीति में भी बड़ा दांव खेला है। 'भाषा दिवस' के अवसर पर आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री ने भाजपा के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज को राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बंगविभूषण' से सम्मानित किया। इस दौरान अनंत महाराज मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा करते नजर आए, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
विशेषज्ञों की राय: क्या होगा चुनावी असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिकुर रहमान का टीएमसी में आना राज्य चुनावों से पहले एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है:
अल्पसंख्यक वोट बैंक: रहमान की मुस्लिम मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ टीएमसी की लोकप्रियता को और बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।
संगठनात्मक चुनौती: विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि प्रतिकुर के लिए वामपंथी विचारधारा से निकलकर टीएमसी की आक्रामक और सत्ता-केंद्रित कार्यशैली में खुद को ढालना एक बड़ी चुनौती होगी।
निष्कर्ष: एक पूर्व प्रतिद्वंद्वी का पार्टी में आना और विपक्षी सांसद का सरकारी मंच पर मुख्यमंत्री के साथ खड़ा होना, बंगाल की बदलती राजनीति का संकेत दे रहा है। आने वाले दिनों में यह 'पिक्चर' क्या मोड़ लेती है, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।