ट्रंप के 'टैरिफ वार' पर भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल का बड़ा प्रहार: "संविधान का पालन करें राष्ट्रपति, कांग्रेस को बायपास न करें"

अमेरिका के नवनियुक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 15% वैश्विक टैरिफ (Global Tariff) पर कानूनी विवाद गहरा गया है। प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी वकील और पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नील कत्याल ने इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए इसे असंवैधानिक बताया है। कत्याल ने तर्क दिया है कि राष्ट्रपति कर लगाने के मामले में अमेरिकी कांग्रेस की शक्तियों का अतिक्रमण नहीं कर सकते।

22 Feb 2026  |  11

वॉशिंगटन/नई दिल्ली | अमेरिका के नवनियुक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 15% वैश्विक टैरिफ (Global Tariff) पर कानूनी विवाद गहरा गया है। प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी वकील और पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नील कत्याल ने इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए इसे असंवैधानिक बताया है। कत्याल ने तर्क दिया है कि राष्ट्रपति कर लगाने के मामले में अमेरिकी कांग्रेस की शक्तियों का अतिक्रमण नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा टकराव

यह विवाद तब और गरमा गया जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के पिछले टैरिफ कार्यों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA)' के तहत अपने अधिकारों का उल्लंघन किया है। कोर्ट के अनुसार, कर लगाने की शक्ति मुख्य रूप से कांग्रेस के पास सुरक्षित है।

इसके जवाब में ट्रंप ने 'ट्रेड एक्ट 1974' की धारा 122 का हवाला देते हुए पहले 10% और फिर उसे बढ़ाकर 15% टैरिफ लागू कर दिया। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ट्रुथ सोशल पर "अत्यंत जनविरोधी और अमेरिका-विरोधी" करार दिया है।

कत्याल की कानूनी दलील: 'व्यापार घाटा' बनाम 'भुगतान संतुलन'

नील कत्याल, जिन्होंने हाल ही में ट्रंप के खिलाफ एक बड़ा व्यापारिक मामला जीता है, ने सोशल मीडिया (X) पर लिखा:

"अगर राष्ट्रपति को लगता है कि टैरिफ एक अच्छा विचार है, तो उन्हें अमेरिकी तरीका अपनाना चाहिए और कांग्रेस के पास जाना चाहिए। यदि उनके विचार सही हैं, तो उन्हें कांग्रेस को मनाने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। हमारा संविधान यही मांग करता है।"

कत्याल ने तकनीकी बिंदु उठाते हुए कहा कि न्याय विभाग (DOJ) ने खुद पहले कोर्ट में कहा था कि धारा 122 व्यापार घाटे (Trade Deficits) की स्थिति में लागू नहीं होती, क्योंकि यह 'भुगतान संतुलन घाटे' (Balance-of-Payments Deficits) से वैचारिक रूप से अलग है। आईएमएफ की पूर्व अधिकारी गीता गोपीनाथ ने भी कत्याल के इस विश्लेषण का समर्थन किया है।

भारत पर क्या होगा असर?

ट्रंप के इस फैसले की आंच भारत तक भी पहुंचेगी। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, जब तक किसी अन्य विशेष अधिकार का प्रयोग नहीं किया जाता, तब तक भारत जैसे देश भी इस नए वैश्विक टैरिफ के दायरे में रहेंगे। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार पर एक अंतरिम समझौते (Interim Agreement) की दिशा में काम कर रहे हैं।

कौन हैं नील कत्याल?

शिकागो में भारतीय प्रवासी माता-पिता (एक डॉक्टर और एक इंजीनियर) के घर जन्मे नील कत्याल अमेरिका के सबसे प्रभावशाली वकीलों में से एक हैं:

शिक्षा: डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से स्नातक।

अनुभव: जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के क्लर्क रहे और ओबामा प्रशासन में कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल के रूप में सेवा दी।

रिकॉर्ड: उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक मामलों में बहस की है, जो किसी भी अल्पसंख्यक वकील के लिए एक रिकॉर्ड है।

प्रमुख केस: वोटिंग राइट्स एक्ट 1965 की रक्षा और 2017 में ट्रंप के 'ट्रैवल बैन' को चुनौती देना।

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