भारत के नीले आसमान में फिर उतरेंगे सी-प्लेन: बजट में सब्सिडी का बूस्टर, लक्षद्वीप और कोच्चि के बीच जल्द शुरू होगी सेवा

भारत में सी-प्लेन (Sea-Plane) सेवाओं को एक बार फिर से नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। कई सालों की असफल कोशिशों और चुनौतियों के बाद, केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए 'बजट' का सहारा लिया है। सब्सिडी और 'मेक इन इंडिया' के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों से उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार सी-प्लेन केवल एक प्रयोग नहीं, बल्कि भारत की कनेक्टिविटी का मुख्य हिस्सा बनेंगे।

22 Feb 2026  |  23

नई दिल्ली: भारत में सी-प्लेन (Sea-Plane) सेवाओं को एक बार फिर से नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। कई सालों की असफल कोशिशों और चुनौतियों के बाद, केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए 'बजट' का सहारा लिया है। सब्सिडी और 'मेक इन इंडिया' के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों से उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार सी-प्लेन केवल एक प्रयोग नहीं, बल्कि भारत की कनेक्टिविटी का मुख्य हिस्सा बनेंगे।

सरकार का मास्टरस्ट्रोक: सब्सिडी और आर्थिक मदद

पिछली विफलताओं से सबक लेते हुए, वित्त मंत्री ने हालिया बजट में सी-प्लेन सेवाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) की घोषणा की है।

आर्थिक सुरक्षा चक्र: यह फंडिंग उन प्रोजेक्ट्स को सहारा देगी जो पर्यटन और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन शुरुआती दौर में मुनाफा कमाने में संघर्ष कर सकते हैं।

स्वदेशी निर्माण: सरकार अब केवल विदेशी विमानों पर निर्भर रहने के बजाय 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू स्तर पर सी-प्लेन निर्माण को भी बढ़ावा दे रही है।

कोच्चि से लक्षद्वीप: पर्यटन के नए द्वार

निजी विमानन कंपनी 'स्काईहॉप एविएशन' इस दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी जल्द ही कोच्चि से लक्षद्वीप के पांच प्रमुख द्वीपों—अगत्ती, कवरत्ती, कल्पेनी, किल्टन और कदमत के लिए उड़ानें शुरू करेगी।

विमान की खासियत: इस मार्ग पर 19 सीटों वाले 'ट्विन ऑटर' विमान का इस्तेमाल किया जाएगा, जो समुद्री लहरों और आसमान के बीच सफर को बेहद सुगम बनाएगा।

इतिहास और चुनौतियां: क्या इस बार बदलेगी तस्वीर?

भारत में सी-प्लेन का सफर 2010 में 'पवन हंस' के साथ शुरू हुआ था, लेकिन परिचालन लागत और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण अंडमान से लेकर कोच्चि तक के प्रोजेक्ट्स ठप पड़ गए थे। इस बार भी कुछ चुनौतियां बरकरार हैं:

पायलटों की कमी: सी-प्लेन उड़ाने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित पायलटों की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा है।

सुरक्षा मानक: समुद्र में लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए कड़े सुरक्षा मानकों को बनाए रखना अनिवार्य है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर: वाटर एयरोड्रोम का विकास अभी भी शुरुआती चरण में है।

क्यों है भारत के लिए गेम-चेंजर?

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा और सैकड़ों द्वीप इसे सी-प्लेन के लिए दुनिया का सबसे आदर्श बाजार बनाते हैं।

समय की बचत: घंटों की फेरी यात्रा अब मिनटों की उड़ान में बदल जाएगी।

आपातकालीन सेवा: यह सेवा न केवल पर्यटन, बल्कि मेडिकल इमरजेंसी और आपदा राहत में भी संजीवनी साबित हो सकती है।

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