रिटायर्ड सैन्य अफसरों के किताब लिखने पर नहीं लगेगी 20 साल की रोक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अटकलों पर लगाया विराम
पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की संस्मरण पुस्तक "फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी" (Four Stars of Destiny) को लेकर जारी विवाद के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने उन तमाम अटकलों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के किताब लिखने पर 20 साल का 'कूलिंग-ऑफ' पीरियड (अनिवार्य अंतराल) लगाने की तैयारी कर रही है।
22 Feb 2026
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नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की संस्मरण पुस्तक "फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी" (Four Stars of Destiny) को लेकर जारी विवाद के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने उन तमाम अटकलों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के किताब लिखने पर 20 साल का 'कूलिंग-ऑफ' पीरियड (अनिवार्य अंतराल) लगाने की तैयारी कर रही है।
सरकार का रुख: कोई नया प्रतिबंध नहीं
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं लाया गया है जो सेवानिवृत्त अधिकारियों को 20 साल तक लिखने से रोके। उन्होंने कहा:
किताब लिखने की आजादी: सैन्य अधिकारियों के रिटायरमेंट के तुरंत बाद किताब लिखने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
नियमों में स्पष्टता: पूर्व सेना प्रमुखों सहित सभी अधिकारियों के लिए लिखने की स्वतंत्रता बरकरार रहेगी।
क्यों शुरू हुआ विवाद?
विवाद की जड़ जनरल एम.एम. नरवणे की आगामी पुस्तक है, जिसके कुछ अंशों में कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी होने की बात कही गई है।
रिलीज पर रोक: साल 2024 में रिलीज होने वाली इस किताब को रक्षा मंत्रालय की समीक्षा (Review) के कारण फिलहाल रोक दिया गया है।
संसद में गूँज: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा संसद में इस किताब के कुछ अंश पढ़ने की कोशिश के बाद यह मामला सुर्खियों में आया।
पुलिस कार्रवाई: एक पत्रिका द्वारा किताब पर आधारित रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में मामला भी दर्ज किया है।
मौजूदा नियम: राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि
हालांकि 20 साल की रोक का कोई नियम नहीं है, लेकिन रक्षा मंत्रालय नई गाइडलाइंस पर गंभीरता से विचार कर रहा है। वर्तमान में लागू व्यवस्था इस प्रकार है:
ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (OSA): यह कानून रिटायरमेंट के बाद भी लागू रहता है। कोई भी पूर्व अधिकारी गोपनीय या संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकता।
समीक्षा अनिवार्य: यदि किताब में सैन्य अभियानों, हथियारों की क्षमता या खुफिया जानकारी का जिक्र है, तो उसे प्रकाशन से पहले रक्षा मंत्रालय से मंजूरी लेना अनिवार्य है।
फिक्शन पर भी नजर: काल्पनिक कहानियों पर भी रोक लगाई जा सकती है यदि उनमें वास्तविक सैन्य रणनीतियों का खुलासा होता हो।
आगामी गाइडलाइंस की संभावना
सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय एक ऐसी नियमावली तैयार कर रहा है जो मौजूदा सर्विस रूल्स और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के प्रावधानों को जोड़कर बनाई जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य सेवानिवृत्त दिग्गजों के अनुभवों को साझा करने की स्वतंत्रता और देश की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना है।
निष्कर्ष: सरकार फिलहाल किसी भी अधिकारी की अभिव्यक्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित करने वाली जानकारियों पर सख्ती जारी रहेगी।