राजस्थान में 'साइबर सरकार' का पर्दाफाश: PM-किसान और पेंशन योजनाओं में करोड़ों का सेंधमारी, 51 गिरफ्तार

राजस्थान में सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर एक समानांतर 'साइबर सरकार' खड़ी कर ली थी। पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और झालावाड़ पुलिस द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन शटरडाउन' में अब तक 51 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें उच्च स्तरीय सरकारी अधिकारी और ई-मित्र संचालक शामिल हैं।

23 Feb 2026  |  24

झालावाड़/जयपुर। राजस्थान में सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर एक समानांतर 'साइबर सरकार' खड़ी कर ली थी। पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और झालावाड़ पुलिस द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन शटरडाउन' में अब तक 51 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें उच्च स्तरीय सरकारी अधिकारी और ई-मित्र संचालक शामिल हैं।

घोटाले का तरीका: 'आधा तेरा, आधा मेरा'

जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क गांव के छोटे एजेंटों से लेकर जयपुर के सचिवालय तक फैला था। गिरोह के सदस्य मासूम ग्रामीणों को सरकारी योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके आधार कार्ड लेते थे और बदले में मिलने वाली राशि का 50% खुद रख लेते थे।

हजारी लाल (पीड़ित): महज 15 साल के एक किशोर ने उनसे आधार कार्ड मांगा और 8 दिन बाद उनके खाते में ₹10,000 आए, जिसमें से ₹5,000 एजेंट ने ले लिए। हजारी लाल को आज भी नहीं पता कि यह पैसा किस योजना का था।

फर्जी दिव्यांगता: मनोहर थाना क्षेत्र में गिरोह ने जनगणना के आंकड़ों को धता बताते हुए लगभग दो-तिहाई आबादी को कागजों पर 'दिव्यांग' दिखा दिया ताकि वे पेंशन ले सकें।

निशाने पर रही तीन मुख्य योजनाएं

जांचकर्ताओं ने पाया कि घोटालेबाजों ने उन पोर्टल्स को निशाना बनाया जहाँ सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया कमजोर थी:

योजनागबन का तरीकापकड़ी गई हेराफेरी
PM-किसानअपात्र लोगों का पंजीकरण और 'ऑटो-अप्रूवल' सुविधा का गलत इस्तेमाल।₹14.81 करोड़
सामाजिक सुरक्षा पेंशनफर्जी डॉक्टर की सील लगाकर जाली दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाना।₹3.62 करोड़ (केवल झालावाड़)
फसल खराबा (DMIS)पात्र किसानों के डेटा को अपने या रिश्तेदारों के बैंक खातों से बदलना।₹3.62 करोड़

मास्टरमाइंड और 'साइबर सेंधमारी'

पुलिस ने इस खेल के दो मुख्य किरदारों को दबोचा है:

रामवतार सैनी (28): पूर्व में गन्ने का जूस बेचने वाला यह शख्स गिरोह का मास्टरमाइंड था। वह सरकारी सिस्टम की बारीक जानकारी रखता था और एजेंटों का एक नेटवर्क चलाता था।

विक्रम सैनी (25): इसे गिरोह का 'तकनीकी विशेषज्ञ' माना जा रहा है। इसने Burp Suite जैसे ऐप्स के जरिए सरकारी पोर्टल्स की सुरक्षा में सेंध लगाई और फर्जी आईडी बनाकर अपात्र लोगों को अप्रूवल दिया।

हैरानी की बात यह है कि PM-किसान के राजस्थान नोडल कार्यालय के मुख्य ऑपरेटर मोहम्मद लायक को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिसने निजी लोगों को सरकारी आईडी उपलब्ध कराई थी।

व्हिसलब्लोअर ने खोला राज

इस महाघोटाले का खुलासा अगस्त 2025 में एक व्हिसलब्लोअर की सूचना के बाद हुआ। एसपी अमित कुमार के नेतृत्व में चली जांच में 11,000 से अधिक संदिग्ध बैंक खाते और 99 लाख लोगों का संवेदनशील डेटा बरामद किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से लग्जरी गाड़ियां और ₹3 करोड़ से अधिक की नकदी जब्त की है।

"हमने अभी केवल एक मॉड्यूल को पकड़ा है। राज्य और देश में ऐसे कई और मॉड्यूल सक्रिय हो सकते हैं। यह केवल बर्फ के पहाड़ की एक नोक (Tip of the iceberg) मात्र है।"

अमित कुमार, एसपी, झालावाड़

तकनीकी खामियां बनीं मददगार

जांचकर्ताओं के अनुसार, PM-किसान योजना में 2019 से लंबित किस्तों का एक साथ भुगतान होना अपराधियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बना। निष्क्रिय पड़े खातों को सक्रिय कर उनमें एक साथ बड़ी राशि ट्रांसफर की गई और फिर उन खातों को बंद कर दिया गया।

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