समुद्र में बढ़ेगी भारत की धाक: 27 फरवरी को नौसेना में शामिल होगा 'डॉल्फिन हंटर' INS अंजदिप
भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। आगामी 27 फरवरी 2026 को चेन्नई पोर्ट पर एक भव्य समारोह के दौरान युद्धपोत INS अंजदिप (Anjadip) को भारतीय नौसेना में कमीशन किया जाएगा। 'आत्मनिर्भर भारत' की संकल्पना को साकार करता यह पोत दुश्मन की पनडुब्बियों के लिए काल साबित होगा।
23 Feb 2026
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चेन्नई: भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। आगामी 27 फरवरी 2026 को चेन्नई पोर्ट पर एक भव्य समारोह के दौरान युद्धपोत INS अंजदिप (Anjadip) को भारतीय नौसेना में कमीशन किया जाएगा। 'आत्मनिर्भर भारत' की संकल्पना को साकार करता यह पोत दुश्मन की पनडुब्बियों के लिए काल साबित होगा।
नौसेना प्रमुख की मौजूदगी में होगा ऐतिहासिक आगाज
इस महत्वपूर्ण कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी करेंगे। कार्यक्रम में भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी शिरकत करेंगे। चेन्नई में इस समारोह को लेकर तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।
स्वदेशी तकनीक का बेजोड़ नमूना: GRSE का निर्माण
INS अंजदिप का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने किया है। यह 'एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट' (ASW-SWC) परियोजना का तीसरा जहाज है।
खासियत: इसे विशेष रूप से तटीय और उथले समुद्री इलाकों (Shallow Waters) में दुश्मन की गतिविधियों को नाकाम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
सोनार सिस्टम: यह स्वदेशी 'हुल माउंटेड सोनार अभय' से लैस है, जो पानी के नीचे छिपी पनडुब्बियों की सटीक पहचान करने में सक्षम है।
क्यों कहा जा रहा है 'डॉल्फिन हंटर'?
INS अंजदिप अपनी फुर्ती और घातक प्रहार क्षमता के कारण चर्चा में है। इसकी मुख्य भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं:
सर्च एंड डिस्ट्रॉय: दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें नष्ट करना।
हथियार: यह लाइटवेट टॉरपीडो और एडवांस ASW रॉकेट से लैस है।
बहुआयामी भूमिका: तटीय निगरानी के अलावा, यह सर्च एंड रेस्क्यू (SAR) और लो-इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशन (LIMO) में भी माहिर है।
INS अंजदिप: एक नजर में क्षमताएं
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| लंबाई | 77 मीटर |
| अधिकतम रफ्तार | 25 नॉट्स |
| प्रोपल्शन | हाई-स्पीड वॉटर-जेट सिस्टम |
| नाम का आधार | कारवार (कर्नाटक) के ऐतिहासिक 'अंजदिप द्वीप' पर |
सामरिक महत्व: मजबूत होगी तटीय सुरक्षा
कर्नाटक के अंजदिप द्वीप के नाम पर रखा गया यह पोत न केवल ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देता है, बल्कि तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को भी अभेद्य बनाएगा। भारतीय नौसेना को एक 'बिल्डर्स नेवी' (निर्माण करने वाली नौसेना) बनाने की दिशा में यह एक मील का पत्थर है।