एआई की दुनिया में 'एंटीग्रेविटी' विवाद: गूगल ने OpenClaw यूजर्स पर लगाया प्रतिबंध, फाउंडर ने बताया 'क्रूर' रवैया

गूगल ने अपने एआई आधारित कोडिंग टूल 'एंटीग्रेविटी' (Antigravity) के कथित दुरुपयोग का हवाला देते हुए कई Gemini Pro यूजर्स के एक्सेस को ब्लॉक कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद OpenClaw के फाउंडर पीटर स्टीनबर्गर (Peter Steinberger) और गूगल के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब एआई टूल्स डेवलपर्स की कार्यक्षमता का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।

23 Feb 2026  |  31

कैलिफोर्निया/सिलिकॉन वैली: गूगल ने अपने एआई आधारित कोडिंग टूल 'एंटीग्रेविटी' (Antigravity) के कथित दुरुपयोग का हवाला देते हुए कई Gemini Pro यूजर्स के एक्सेस को ब्लॉक कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद OpenClaw के फाउंडर पीटर स्टीनबर्गर (Peter Steinberger) और गूगल के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब एआई टूल्स डेवलपर्स की कार्यक्षमता का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।

क्या है विवाद की मुख्य वजह?

विवाद के केंद्र में OpenClaw नामक एक डेस्कटॉप-आधारित एआई टूल है, जो बिना कोडिंग बैकग्राउंड वाले यूजर्स को सॉफ्टवेयर लिखने में मदद करता है। इसके लिए यह गूगल के 'एंटीग्रेविटी' टूल का उपयोग करता है।

गूगल की कार्रवाई: गूगल ने उन यूजर्स के अकाउंट्स और एक्सेस सीमित कर दिए हैं जो OpenClaw के जरिए गूगल के एआई मॉडल (Gemini Pro/Ultra) से जुड़े थे।

बैन का प्रभाव: रिपोर्टों के अनुसार, कुछ प्रीमियम यूजर्स (जो $250/महीना तक का भुगतान कर रहे थे) को बिना किसी पूर्व सूचना के ब्लॉक कर दिया गया, जिससे उनकी अन्य सेवाएं जैसे Gmail और Workspace भी प्रभावित होने की खबरें हैं।

पीटर स्टीनबर्गर का हमला: "गूगल बेरहम है"

ओपनक्लॉ के क्रिएटर पीटर स्टीनबर्गर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर गूगल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस कदम को 'Draconian' (अत्यंत कठोर/बेरहम) करार दिया।

"गूगल बिना किसी चेतावनी के सीधे बैन कर देता है, जबकि Anthropic जैसी अन्य कंपनियां समस्याओं पर बेहतर संवाद करती हैं। डेवलपर्स को एंटीग्रेविटी इस्तेमाल करते समय सावधान रहना चाहिए।" — पीटर स्टीनबर्गर

गूगल की सफाई: "क्वालिटी बचाना था जरूरी"

गूगल के एंटीग्रेविटी लीड वरुण मोहन ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि कंपनी ने एंटीग्रेविटी के बैकएंड पर 'मैलीशियस यूसेज' (Malicious Usage) में भारी बढ़ोतरी देखी थी।

तर्क: गूगल का दावा है कि इस दुरुपयोग के कारण सर्विस की क्वालिटी गिर रही थी और वास्तविक यूजर्स को परेशानी हो रही थी।

पॉलिसी उल्लंघन: गूगल के अनुसार, थर्ड-पार्टी टूल्स के जरिए OAuth टोकन का उपयोग करना उनके 'टर्म्स ऑफ सर्विस' (ToS) का उल्लंघन है।

भविष्य की चिंता: टेक कंपनियों का एकाधिकार?

इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या टेक कंपनियां एकतरफा फैसला लेकर किसी यूजर की डिजिटल लाइफ को ठप कर सकती हैं? जहाँ एक ओर कंपनियां सुरक्षा का तर्क दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर डेवलपर्स और यूजर्स इसे तकनीकी तानाशाही मान रहे हैं।

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