US टैरिफ और सोने की कीमतों पर वित्त मंत्री का रुख: भारत की व्यापार रणनीति का पूरा विश्लेषण

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ (आयात शुल्क) में किए गए नए बदलावों और वैश्विक बाजार में सोने की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को स्पष्ट किया कि भारत फिलहाल 'प्रतीक्षा करो और देखो' (Wait and Watch) की रणनीति अपना रहा है।

23 Feb 2026  |  23

नई दिल्ली। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ (आयात शुल्क) में किए गए नए बदलावों और वैश्विक बाजार में सोने की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को स्पष्ट किया कि भारत फिलहाल 'प्रतीक्षा करो और देखो' (Wait and Watch) की रणनीति अपना रहा है।

1. अमेरिकी टैरिफ विवाद: भारत की तैयारी

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ को अवैध घोषित करने के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित सभी देशों पर 15% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।

सीतारमण का बयान: वित्त मंत्री ने कहा कि इन बदलावों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा, इसका आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी।

समीक्षा जारी: वाणिज्य मंत्रालय वर्तमान में स्थिति की जांच कर रहा है। एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल जल्द ही व्यापार वार्ताओं के समय पर फैसला लेगा।

व्यापार समझौतों पर जोर: भारत वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए यूके, यूरोपीय संघ और ओमान जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते करने के लिए प्रतिबद्ध है।

2. सोने की कीमतों में उछाल: क्या है असली वजह?

सोने की कीमतों में हालिया तेजी को लेकर वित्त मंत्री ने आरबीआई (RBI) के केंद्रीय निदेशक मंडल के साथ बैठक के बाद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की:

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण भारत सरकार की नीति नहीं, बल्कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही भारी खरीदारी और भंडारण है।

घरेलू मांग: भारतीय परिवारों में निवेश के लिए सोने के प्रति आकर्षण और आगामी त्योहारों के कारण मांग में वृद्धि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।

राहत की बात: वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया कि कीमतें अभी तक 'खतरनाक स्तर' पर नहीं पहुंची हैं और सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

3. बैंकिंग सेक्टर को सख्त चेतावनी: 'मिस-सेलिंग' एक अपराध

वित्त मंत्री ने बैंकों द्वारा ग्राहकों को जबरन बीमा या अन्य वित्तीय उत्पाद बेचने (Misselling) पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है:

नसीहत: बैंकों को अपने 'मूल व्यवसाय' (Core Business) पर ध्यान देना चाहिए।

चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मिस-सेलिंग एक अपराध है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

4. IDFC फर्स्ट बैंक पर स्पष्टीकरण

मार्केट में चल रही अटकलों को विराम देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि IDFC फर्स्ट बैंक में कोई 'प्रणालीगत समस्या' (Systemic Issue) नहीं है। उन्होंने व्यक्तिगत कंपनियों पर टिप्पणी न करने की सरकारी नीति को भी दोहराया।

निष्कर्ष: भारत का अगला कदम

अमेरिका की नई व्यापार नीतियों और वैश्विक कमोडिटी बाजार की उथल-पुथल के बीच भारत अपनी आर्थिक संप्रभुता और मध्यम वर्ग के हितों की रक्षा के लिए सावधानी से कदम बढ़ा रहा है। वाणिज्य मंत्रालय का प्रतिनिधिमंडल आगामी वार्ताओं में भारत के निर्यातकों के हितों को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा।

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