जिंदगी बचाने की जंग हार गई 'उम्मीदों की उड़ान': चतरा के जंगलों में एयर एम्बुलेंस क्रैश, सात की मौत

नियति का क्रूर मजाक कहें या मौसम की मार, रांची से दिल्ली के लिए बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर उड़ा एक विमान अपनी मंजिल तक पहुंचने से पहले ही काल के गाल में समा गया। सोमवार देर शाम चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत घने जंगलों में एक एयर एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हृदयविदारक हादसे में विमान में सवार मरीज संजय कुमार समेत सभी सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।

24 Feb 2026  |  17

चतरा/रांची: नियति का क्रूर मजाक कहें या मौसम की मार, रांची से दिल्ली के लिए बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर उड़ा एक विमान अपनी मंजिल तक पहुंचने से पहले ही काल के गाल में समा गया। सोमवार देर शाम चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत घने जंगलों में एक एयर एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हृदयविदारक हादसे में विमान में सवार मरीज संजय कुमार समेत सभी सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।

बेहतर इलाज की आस में उठी थी 'अंतिम उड़ान'

हादसे का शिकार हुए 40 वर्षीय संजय कुमार पेशे से ढाबा संचालक थे। कुछ दिन पूर्व एक भीषण आगजनी में वे 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। रांची के एक निजी अस्पताल में 10 दिनों तक संघर्ष करने के बाद, परिजनों ने पाई-पाई जोड़कर और रिश्तेदारों के सहयोग से उन्हें दिल्ली के बड़े अस्पताल ले जाने के लिए एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की थी। उन्हें क्या पता था कि जीवन बचाने की यह आखिरी कोशिश एक बड़ी त्रासदी में बदल जाएगी।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, विमान ने शाम 7:07 बजे रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के लगभग आधे घंटे बाद ही खराब मौसम के कारण विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क टूट गया। बताया जा रहा है कि पायलट ने मौसम की खराबी के कारण रास्ता बदलने की अनुमति भी मांगी थी, लेकिन इसके कुछ ही देर बाद विमान सिमरिया के जंगलों में क्रैश हो गया।

चतरा एसपी सुमित अग्रवाल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विमान का संपर्क वाराणसी या लखनऊ एटीसी से नहीं हो पाया था। अंतिम बार इसका संपर्क कोलकाता एटीसी से हुआ था, जिसके बाद यह रडार से गायब हो गया।

हादसे में बुझ गए सात चिराग

इस भीषण दुर्घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि कर्तव्य पथ पर तैनात मेडिकल टीम और पायलटों को भी लील लिया। हादसे में जान गंवाने वालों की सूची इस प्रकार है:

नामपरिचय
संजय कुमार (40 वर्ष)मरीज (ढाबा संचालक)
अर्चना देवी (35 वर्ष)मरीज की पत्नी
ध्रुव कुमार (17 वर्ष)मरीज का भगीना
डॉ. विकास कुमार गुप्ताचिकित्सक
सचिन कुमार मिश्रापैरामेडिकल कर्मी
विवेक विकास भगतमुख्य पायलट
सौराजदीप सिंहसह-पायलट

शोक में डूबा इलाका

संजय कुमार जो रोज अपने ढाबे पर लोगों की भूख मिटाते थे, उनके इस तरह चले जाने से पूरे इलाके में मातम पसरा है। अपनों को खोने का गम और बेहतर भविष्य की उम्मीदों का इस तरह बिखर जाना हर किसी को झकझोर गया है। फिलहाल प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य के बाद जांच के आदेश दे दिए गए हैं ताकि तकनीकी खराबी या अन्य कारणों का स्पष्ट पता लगाया जा सके।

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