ईरान पर हमले की जिद और जनरल की 'चेतावनी': ट्रंप के सैन्य अभियान पर पेंटागन ने उठाए सवाल
मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में युद्ध के बादल गहराने लगे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बार-बार दिए जा रहे संकेतों के बीच, पेंटागन के एक शीर्ष अधिकारी की चेतावनी ने हड़कंप मचा दिया है। जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति और वरिष्ठ अधिकारियों को एक रणनीतिक (Strategic) चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्होंने जरूरी हथियारों की कमी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अभाव पर गंभीर चिंता जताई है।
24 Feb 2026
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वॉशिंगटन डीसी: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में युद्ध के बादल गहराने लगे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बार-बार दिए जा रहे संकेतों के बीच, पेंटागन के एक शीर्ष अधिकारी की चेतावनी ने हड़कंप मचा दिया है। जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति और वरिष्ठ अधिकारियों को एक रणनीतिक (Strategic) चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्होंने जरूरी हथियारों की कमी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अभाव पर गंभीर चिंता जताई है।
सैन्य तैयारी पर उठे सवाल: क्या अमेरिका तैयार है?
जनरल केन की यह एडवाइजरी महज एक प्रशासनिक नोट नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी सेना की वर्तमान स्थिति का एक कड़वा सच है। जनरल ने दो मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया है:
हथियारों का संकट: ईरान जैसे मजबूत दुश्मन के साथ पूर्ण युद्ध (Full-scale war) के लिए अमेरिकी बेड़े में आवश्यक सैन्य उपकरणों और घातक संसाधनों की खतरनाक कमी है।
सहयोगियों की बेरुखी: अमेरिका के पारंपरिक साथी देशों ने इस संभावित युद्ध से दूरी बनाना शुरू कर दिया है।
अपनों ने ही फेरा मुंह: एयरस्पेस देने से इनकार
ट्रंप प्रशासन के लिए सबसे बड़ा झटका मध्य पूर्व के देशों से लगा है। सऊदी अरब और कतर जैसे मजबूत सहयोगियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे न केवल ईरान पर हमले के खिलाफ हैं, बल्कि वे अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र (Airspace) का इस्तेमाल किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने देंगे। बिना स्थानीय सहयोग के ईरान जैसी भौगोलिक स्थिति वाले देश पर हमला करना अमेरिकी सेना के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
राष्ट्रपति ट्रंप का पलटवार: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है कि जनरल केन ने उन्हें "चेतावनी" दी है। हालांकि, उन्होंने दबे स्वर में यह स्वीकार किया कि जनरल भी अन्य शांतिप्रिय लोगों की तरह यही चाहते हैं कि हमला न हो।
ईरान का सख्त रुख: "हम झुकेंगे नहीं"
इधर, ईरानी अधिकारियों ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। तेहरान की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि वह ट्रंप की किसी भी धमकी से डरने वाला नहीं है और किसी भी दुस्साहस का जवाब 'भीषण पलटवार' से दिया जाएगा।
वैश्विक राजनीति पर असर
जनरल केन की यह चेतावनी अमेरिकी सैन्य शक्ति के लिए एक 'लिटमस टेस्ट' की तरह है। इसका असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है:
घरेलू प्रभाव: अमेरिकी नागरिकों के बीच युद्ध को लेकर डर और अनिश्चितता का माहौल है।
अंतरराष्ट्रीय गठबंधन: ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी अब अपनी सैन्य रणनीति का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। वे इस अनिश्चित माहौल में खुद को किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध का हिस्सा बनाने से कतरा रहे हैं।
निष्कर्ष
आने वाला हफ्ता वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। एक तरफ ट्रंप की 'ताकत दिखाने' की चाहत है और दूसरी तरफ धरातल पर सैन्य तैयारियों की 'गंभीर सीमाएं'। यदि व्हाइट हाउस इन चेतावनियों को नजरअंदाज करता है, तो इसका परिणाम न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी हो सकता है।