शेयर बाजार में 'ब्लैक ट्यूसडे': सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निफ्टी 25,500 के नीचे; निवेशकों के डूबे करोड़ों रुपये
भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा। शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली का ऐसा दौर चला कि सेंसेक्स और निफ्टी के अहम सपोर्ट लेवल ताश के पत्तों की तरह ढह गए। सेंसेक्स जहां 800 अंक गिरकर 82,504 के स्तर पर आ गया, वहीं निफ्टी भी 25,500 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर नीचे फिसल गया। इस गिरावट ने पिछले कुछ दिनों की बढ़त को पूरी तरह धो डाला है।
24 Feb 2026
|
19
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा। शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली का ऐसा दौर चला कि सेंसेक्स और निफ्टी के अहम सपोर्ट लेवल ताश के पत्तों की तरह ढह गए। सेंसेक्स जहां 800 अंक गिरकर 82,504 के स्तर पर आ गया, वहीं निफ्टी भी 25,500 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर नीचे फिसल गया। इस गिरावट ने पिछले कुछ दिनों की बढ़त को पूरी तरह धो डाला है।
बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण
बाजार के जानकारों के अनुसार, आज की इस बड़ी गिरावट के पीछे पांच प्रमुख कारक जिम्मेदार रहे:
AI का डर और IT सेक्टर में हाहाकार: अमेरिकी AI कंपनी 'एंथ्रोपिक' के नए Claude Code टूल के दावे ने भारतीय आईटी कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। इस टूल द्वारा सॉफ्टवेयर सिस्टम को बेहद सस्ते में अपडेट करने की क्षमता की खबर से निफ्टी आईटी इंडेक्स 3% तक टूट गया।
ट्रंप की टैरिफ चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े व्यापारिक रुख और नए टैरिफ लगाने की धमकी से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता पैदा हो गई है। इसका सीधा असर वॉल स्ट्रीट से लेकर एशियाई बाजारों पर दिखा।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 1% उछलकर 72.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपया 7 पैसे कमजोर होकर 90.96 के स्तर पर आ गया, जिससे विदेशी निवेशकों का मनोबल प्रभावित हुआ।
वीकली एक्सपायरी का दबाव: आज निफ्टी डेरिवेटिव्स की साप्ताहिक एक्सपायरी होने के कारण ट्रेडर्स के बीच पोजीशन एडजस्ट करने की होड़ मची रही, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) चरम पर रहा।
सेक्टर का हाल: सिर्फ मेटल और सरकारी बैंक संभले
बाजार में हर तरफ लाल निशान का बोलबाला रहा, लेकिन मेटल सेक्टर और सरकारी बैंकों (PSU Banks) में मामूली खरीदारी देखी गई। इसके विपरीत, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी आधा प्रतिशत तक लुढ़क गए, जिससे छोटे निवेशकों को भारी चपत लगी है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ग्लोबल संकेतों में सुधार नहीं होता और रुपये की गिरावट नहीं रुकती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की नीति अपनानी चाहिए।
प्रमुख आंकड़े एक नजर में:
सेंसेक्स: 82,504 (-800 अंक)
निफ्टी: 25,482 (-230 अंक)
निफ्टी आईटी: -3% (सबसे ज्यादा गिरावट)
कच्चा तेल: $72.13 प्रति बैरल
रुपया: 90.96 प्रति डॉलर