कर्ज के पहाड़ पर खड़ी जनता: देश का रिटेल लोन ₹162 लाख करोड़ के पार, गोल्ड लोन में 44% का भारी उछाल
भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोग और निवेश की रफ्तार के बीच एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। मंगलवार को जारी CRIF हाई मार्क की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर तिमाही 2025 तक देश का कुल बकाया रिटेल लोन (Outstanding Retail Loan) 18.1% बढ़कर ₹162 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज का सहारा ले रहे हैं।
24 Feb 2026
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नई दिल्ली | भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोग और निवेश की रफ्तार के बीच एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। मंगलवार को जारी CRIF हाई मार्क की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर तिमाही 2025 तक देश का कुल बकाया रिटेल लोन (Outstanding Retail Loan) 18.1% बढ़कर ₹162 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज का सहारा ले रहे हैं।
गोल्ड लोन बना सबसे पसंदीदा विकल्प
रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाली वृद्धि गोल्ड लोन सेगमेंट में देखी गई है। कीमतों में तेजी और त्योहारों के सीजन के कारण लोगों ने सोने के बदले कर्ज लेने में भारी दिलचस्पी दिखाई है।
गोल्ड लोन में वृद्धि: सभी ऋण संस्थाओं का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 44.1% बढ़कर ₹16.2 लाख करोड़ हो गया है।
प्रमुख कारण: सोने की बढ़ती कीमतें, त्योहारों की मांग और जीएसटी (GST) प्रक्रियाओं में सुधार ने इस सेगमेंट को नई गति दी है।
होम लोन: सबसे बड़ी हिस्सेदारी लेकिन धीमी रफ्तार
रिटेल लोन मार्केट का सबसे बड़ा हिस्सा अभी भी होम लोन के पास है, हालांकि इसकी विकास दर औसत से कम रही है।
कुल बकाया: होम लोन सेगमेंट 10.5% की वृद्धि के साथ ₹43 लाख करोड़ पर पहुंच गया है।
क्षेत्रीय रुझान: तेलंगाना, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में होम लोन की मांग राष्ट्रीय औसत से अधिक रही, जबकि दिल्ली में सबसे धीमी (7.7%) ग्रोथ दर्ज की गई।
टिकट साइज: एक्टिव लोन की संख्या में 3.3 लाख की वृद्धि हुई है, जो दर्शाता है कि अब लोग बड़े मकानों के लिए ज्यादा राशि का कर्ज ले रहे हैं।
विभिन्न सेक्टर्स में कर्ज की स्थिति: एक नजर में
| लोन का प्रकार | बकाया राशि (₹ लाख करोड़) | सालाना वृद्धि (%) |
|---|---|---|
| कुल रिटेल लोन | 162.0 | 18.1% |
| होम लोन | 43.0 | 10.5% |
| गोल्ड लोन | 16.2 | 44.1% |
| पर्सनल लोन | 15.9 | 11.6% |
| ऑटो लोन | - | 14.6% |
| टू-व्हीलर लोन | - | 12.3% |
एसेट क्वालिटी में सुधार: कर्ज चुकाने में भारतीय आगे
एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि लोग अपने कर्ज की किश्तें (EMIs) समय पर चुका रहे हैं। 30 से 180 दिनों के बीच बकाया रहने वाले लोन (Delinquency) में सुधार हुआ है:
दिसंबर 2024: 3.2% बकाया था।
दिसंबर 2025: यह घटकर 2.8% रह गया है।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि कर्ज बढ़ने के बावजूद बैंकों और NBFCs की 'एसेट क्वालिटी' में सुधार हुआ है।
छोटे कारोबारियों ने भी लिया जमकर कर्ज
रिपोर्ट के अनुसार, सोल-प्रोप्राइटर (एकल स्वामित्व) कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज में 26.2% का बड़ा इजाफा हुआ है। यह संकेत है कि छोटे व्यवसायी अपने व्यापार विस्तार के लिए क्रेडिट पर निर्भर हो रहे हैं। वहीं, सरकारी बैंकों (PSU Lenders) ने भी तीसरी तिमाही में अपनी पकड़ मजबूत की और कुल नए लोन ओरिजिनेशन में आधे से ज्यादा की हिस्सेदारी दर्ज की।
विशेषज्ञ की राय: त्योहारों की रौनक और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (Consumer Durables) की मांग ने रिटेल लोन के आंकड़ों को नई ऊंचाई दी है। हालांकि, गोल्ड लोन में 44% की वृद्धि सतर्क रहने का भी संकेत है, क्योंकि यह अक्सर तात्कालिक नकदी की जरूरत को दर्शाता है।