जॉब मार्केट में बहार: 2026 में 9.1% बढ़ेगी भारतीय कर्मचारियों की सैलरी, दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पछाड़ा

निजी क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए साल 2026 बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू नियमों में बदलाव के बावजूद भारत का जॉब मार्केट न केवल स्थिर है, बल्कि मजबूती से आगे बढ़ रहा है। Aon India के 32वें वार्षिक सर्वेक्षण के मुताबिक, इस साल भारतीय कंपनियों में औसत वेतन वृद्धि 9.1% रहने का अनुमान है, जो पिछले साल (8.9%) की तुलना में अधिक है।

24 Feb 2026  |  22

नई दिल्ली | निजी क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए साल 2026 बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू नियमों में बदलाव के बावजूद भारत का जॉब मार्केट न केवल स्थिर है, बल्कि मजबूती से आगे बढ़ रहा है। Aon India के 32वें वार्षिक सर्वेक्षण के मुताबिक, इस साल भारतीय कंपनियों में औसत वेतन वृद्धि 9.1% रहने का अनुमान है, जो पिछले साल (8.9%) की तुलना में अधिक है।

इन सेक्टर्स में होगी 'छप्परफाड़' बढ़ोतरी

सर्वेक्षण में शामिल 45 उद्योगों की 1,400 कंपनियों के डेटा से पता चलता है कि कुछ खास क्षेत्रों में सैलरी इंक्रीमेंट औसत से कहीं ज्यादा रह सकता है:

टॉप परफॉर्मर्स: रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) सबसे आगे रहेंगी।

मजबूत पकड़: ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर में भी शानदार बढ़ोतरी की उम्मीद है।

वजह: कंपनियों में कुशल टैलेंट (Specialized Skills) की मांग बढ़ रही है, जिसके लिए वे निवेश करने को तैयार हैं।

ग्लोबल लीडर के रूप में भारत का दबदबा

भारत में होने वाली 9.1% की सैलरी ग्रोथ दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले कहीं ज्यादा है। जहाँ विकसित देशों की विकास दर 2% के आसपास सिमट रही है, वहीं भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.2% रहने का अनुमान है।

दुनिया भर में अनुमानित सैलरी बढ़ोतरी (2026): | देश | अनुमानित सैलरी ग्रोथ | | :--- | :--- | | भारत | 9.1% | | ब्राजील | 4.9% | | चीन | 4.8% | | अमेरिका | 4.3% | | यूके / सिंगापुर | 4.1% - 4.2% | | जर्मनी / जापान | 3.7% - 3.9% |

नौकरी छोड़ने की दर (Attrition) में बड़ी गिरावट

एक समय पर 'ग्रेट रेजिग्नेशन' से जूझ रही कंपनियों के लिए राहत की खबर है। अब कर्मचारी अपनी नौकरियों में स्थिरता देख रहे हैं:

2023: 18.7%

2024: 17.7%

2025: 16.2% यह गिरावट दर्शाती है कि महामारी के बाद अब जॉब मार्केट में फिर से स्थिरता लौट आई है और कंपनियां अपने टैलेंट को रिटेन (बनाए रखने) में सफल हो रही हैं।

'वेज कोड' का असर: सैलरी स्ट्रक्चर में होगा बदलाव

भारत में लागू हो रहे नए लेबर कोड के कारण कंपनियां अपने सैलरी ब्रेकअप में बदलाव कर रही हैं। सर्वे के अनुसार:

बेसिक सैलरी में इजाफा: 35% कंपनियां बेसिक पे बढ़ाने की योजना बना रही हैं ताकि कुल वेतन का 50% हिस्सा बेसिक सैलरी का हो सके।

रणनीति: 12% कंपनियां इस बदलाव को अपने सैलरी बजट से मैनेज करेंगी, जबकि 15% ने इसके लिए अलग से फंड सुरक्षित रखा है।

असर: इससे कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग्स (जैसे PF) में बढ़ोतरी होगी, हालांकि हाथ में आने वाली सैलरी (Take Home Pay) पर थोड़ा असर पड़ सकता है।

"भारत अब मजबूत आर्थिक आधार के साथ विकास के अगले चरण में है। घरेलू मांग, कम महंगाई और नए व्यापार समझौते भारत को मध्यम अवधि में विकास का इंजन बनाए रखेंगे।" — रूपंक चौधरी, पार्टनर, Aon India

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