ड्रैगन का 'ट्रेड वॉर': चीन ने 40 जापानी कंपनियों पर लगाए कड़े प्रतिबंध, सैन्य विस्तार का लगाया आरोप

एशिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों, चीन और जापान के बीच तनाव अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने जापान की 40 प्रमुख संस्थाओं को अपनी 'ब्लैकलिस्ट' में शामिल कर दिया है। बीजिंग का आरोप है कि ये कंपनियाँ जापान की सेना को फिर से शक्तिशाली बनाने (पुनर्सैन्यीकरण) और उसकी 'परमाणु महत्वाकांक्षाओं' को हवा देने में सीधे तौर पर मदद कर रही हैं।

24 Feb 2026  |  10

बीजिंग/टोक्यो | एशिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों, चीन और जापान के बीच तनाव अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने जापान की 40 प्रमुख संस्थाओं को अपनी 'ब्लैकलिस्ट' में शामिल कर दिया है। बीजिंग का आरोप है कि ये कंपनियाँ जापान की सेना को फिर से शक्तिशाली बनाने (पुनर्सैन्यीकरण) और उसकी 'परमाणु महत्वाकांक्षाओं' को हवा देने में सीधे तौर पर मदद कर रही हैं।

प्रतिबंधों का चक्रव्यूह: दो सूचियों में बँटी कंपनियाँ

चीन ने इन कंपनियों को दो श्रेणियों में विभाजित किया है, जिससे उनके व्यापारिक हितों पर गहरी चोट पहुँचने की आशंका है:

निर्यात नियंत्रण सूची (Export Control List): इसमें 20 कंपनियाँ शामिल हैं। ये अब चीन से 'दोहरे उपयोग' (Dual-use) वाले सामान (जो नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के काम आते हैं) का आयात नहीं कर सकेंगी। इसमें मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज, कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज और फुजित्सु जैसी दिग्गज कंपनियों की सहायक संस्थाएँ शामिल हैं।

निगरानी सूची (Watch List): इसमें 20 अन्य कंपनियों को रखा गया है, जिनमें सुबारू कॉरपोरेशन और मित्सुबिशी मैटेरियल्स शामिल हैं। इन कंपनियों को चीन से सामान मंगाने के लिए अब कड़ी जांच, जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट और लिखित शपथ पत्र देना होगा कि वे इन वस्तुओं का उपयोग जापानी सेना के लिए नहीं करेंगी।

जापान का तीखा पलटवार: "यह बर्दाश्त के बाहर है"

चीन के इस कदम पर जापान ने कड़ी नाराजगी जताई है। टोक्यो ने इसे 'निंदनीय' करार देते हुए चीनी उप मिशन प्रमुख के समक्ष औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।

"आज घोषित किए गए उपायों को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम इसका कड़ा विरोध करते हैं और चीन से इन्हें तुरंत हटाने का आग्रह करते हैं।"

केई सातो, उप मुख्य कैबिनेट सचिव, जापान

तनाव की असल वजह: ताइवान और क्षेत्रीय सुरक्षा

विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रतिबंधों की जड़ें हालिया राजनीतिक बयानों में छिपी हैं:

ताइवान मुद्दा: जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने नवंबर में संकेत दिया था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ सैन्य बल का प्रयोग करता है, तो जापान मूकदर्शक नहीं रहेगा। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और जापान के इस 'हस्तक्षेप' से भड़का हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं का उल्लंघन: जापान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि चीन के ये प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नियमों से मेल नहीं खाते और पूरी तरह 'अस्वीकार्य' हैं।

कंपनियों पर क्या होगा असर?

कंपनीश्रेणीसंभावित प्रभाव
मित्सुबिशी / कावासाकीनिर्यात नियंत्रणचीन से कच्चे माल और तकनीक के आयात पर पूर्ण रोक।
सुबारू / फुजित्सुनिगरानी सूचीहर व्यापारिक लेन-देन के लिए विशेष लाइसेंस और कड़ी जांच की प्रक्रिया।

राहत की बात: कुछ प्रभावित जापानी कंपनियों ने प्रारंभिक बयान में कहा है कि चीन के साथ उनका व्यापारिक संबंध सीमित है, इसलिए इन प्रतिबंधों का उनके वैश्विक संचालन पर बहुत बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है।

संबंधों पर असर: शीत युद्ध की आहट?

चीन और जापान के बीच यह 'आर्थिक युद्ध' एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बिगाड़ सकता है। चीन जहाँ अपनी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, वहीं जापान भी सुरक्षा के मोर्चे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। आने वाले दिनों में यह तनाव अन्य वैश्विक टेक-कंपनियों और व्यापारिक रूट को भी प्रभावित कर सकता है।

ट्रेंडिंग