मणिशंकर अय्यर की नई 'गुगली': स्टालिन को बताया विपक्षी गठबंधन का सबसे उपयुक्त चेहरा, कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर अपनी बेबाक टिप्पणियों से देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सोमवार को अय्यर ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को 'आईएनडीआईए' (INDIA) गठबंधन के संयोजक पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बताकर अपनी ही पार्टी के लिए एक नई बहस छेड़ दी है। अय्यर का तर्क है कि विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए किसी बड़े राष्ट्रीय दल के बजाय एक क्षेत्रीय नेतृत्व का होना ज्यादा प्रभावी साबित होगा।
24 Feb 2026
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नई दिल्ली | कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर अपनी बेबाक टिप्पणियों से देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सोमवार को अय्यर ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को 'आईएनडीआईए' (INDIA) गठबंधन के संयोजक पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बताकर अपनी ही पार्टी के लिए एक नई बहस छेड़ दी है। अय्यर का तर्क है कि विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए किसी बड़े राष्ट्रीय दल के बजाय एक क्षेत्रीय नेतृत्व का होना ज्यादा प्रभावी साबित होगा।
"21वीं सदी के 'कामराज' हैं एमके स्टालिन"
मणिशंकर अय्यर ने अपने सुझाव के पीछे ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए स्टालिन की तुलना दिग्गज नेता के. कामराज से की। उन्होंने कहा:
ऐतिहासिक संदर्भ: जिस तरह 1962 की परिस्थितियों के बाद जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस के पुनरुद्धार के लिए के. कामराज को जिम्मेदारी सौंपी थी, आज विपक्षी गठबंधन को जीत दिलाने के लिए स्टालिन वही भूमिका निभा सकते हैं।
धर्मनिरपेक्ष छवि: अय्यर ने स्टालिन की "बेदाग धर्मनिरपेक्ष छवि" और आम सहमति बनाने की उनकी प्रशासनिक क्षमता की जमकर सराहना की।
रणनीति: उन्होंने सलाह दी कि स्टालिन राष्ट्रीय स्तर पर मोर्चा संभालें, जबकि तमिलनाडु की कमान उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन को सौंपी जा सकती है।
राहुल गांधी के भविष्य से जोड़ा नेतृत्व का मुद्दा
अय्यर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि 2029 के आम चुनाव में जीत हासिल करनी है, तो गठबंधन का मजबूत होना अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि:
"बिना एक सशक्त आईएनडीआईए गठबंधन के, राहुल गांधी का प्रधानमंत्री बनना संभव नहीं है। कांग्रेस को सबसे बड़ा साझेदार होने के नाते स्टालिन के नेतृत्व से घबराना नहीं चाहिए।"
विरोधियों और अपनों के निशाने पर अय्यर
अय्यर के इस बयान ने जहाँ विपक्षी गठबंधन के भीतर नेतृत्व की खींचतान को उजागर किया है, वहीं भाजपा ने भी इस पर तंज कसने का मौका नहीं गंवाया।
भाजपा का तंज: भाजपा प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने चुटकी लेते हुए कहा, "मणिशंकर अय्यर खुद ममता बनर्जी या अन्य नेताओं से अधिक सक्षम और शिक्षित हैं। विपक्षी गठबंधन को उन्हें ही अपना प्रमुख बना लेना चाहिए।" उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अय्यर के बयानों का उद्देश्य केवल सुर्खियों में बने रहना है।
अधीर रंजन का 'प्रलोभन' वाला वार: बंगाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने अय्यर के बयानों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हो सकता है ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा भेजने का कोई प्रलोभन दिया हो। यह टिप्पणी अय्यर के उस बयान के संदर्भ में थी जिसमें उन्होंने ममता बनर्जी के बिना गठबंधन के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे।
घटनाक्रम का सार: एक नजर में
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अय्यर का सुझाव | एमके स्टालिन को 'आईएनडीआईए' का संयोजक बनाया जाए। |
| अय्यर का तर्क | क्षेत्रीय साथी का नेतृत्व गठबंधन की एकता के लिए बेहतर गारंटी है। |
| भाजपा की प्रतिक्रिया | शाहनवाज हुसैन ने अय्यर को ही नेतृत्व के लिए 'सबसे योग्य' बताकर तंज कसा। |
| पार्टी के भीतर स्थिति | कांग्रेस नेतृत्व में अय्यर के बयान को लेकर गहरी नाराजगी। |
निष्कर्ष: मणिशंकर अय्यर के इस बयान ने विपक्षी खेमे में 'क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय' नेतृत्व की बहस को एक बार फिर जन्म दे दिया है। ऐसे समय में जब कांग्रेस राहुल गांधी को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है, अय्यर का स्टालिन या ममता बनर्जी के पक्ष में झुकना पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है।