रेबीज के खौफ ने ली बैंककर्मी की जान: महाराष्ट्र के ठाणे में 30 वर्षीय युवक ने की आत्महत्या

महाराष्ट्र के ठाणे जिले से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है। कल्याण के चक्की नाका इलाके में रहने वाले एक 30 वर्षीय बैंक कर्मचारी ने रेबीज के लक्षणों के डर से आत्महत्या कर ली। इस घटना ने एक बार फिर पशुओं के काटने के बाद सही चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर बहस छेड़ दी है।

24 Feb 2026  |  13

ठाणे (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के ठाणे जिले से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है। कल्याण के चक्की नाका इलाके में रहने वाले एक 30 वर्षीय बैंक कर्मचारी ने रेबीज के लक्षणों के डर से आत्महत्या कर ली। इस घटना ने एक बार फिर पशुओं के काटने के बाद सही चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर बहस छेड़ दी है।

क्या है पूरा मामला?

मृतक युवक अपने बुजुर्ग माता-पिता और भाई के साथ कल्याण स्थित एक फ्लैट में रहता था। पुलिस जांच के अनुसार, कुछ दिन पहले उसे एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। परिवार को तनाव से बचाने के लिए उसने इस बात को छिपाए रखा और एंटी-रेबीज टीकाकरण (Anti-Rabies Vaccination) का पूरा कोर्स भी नहीं किया।

जब उसका परिवार अपने पैतृक स्थान गया हुआ था और वह घर पर अकेला था, तभी उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। रविवार रात जब परिवार वापस लौटा, तो घर का दरवाजा खोलने पर उन्हें युवक मृत मिला।

सुसाइड नोट में छलका दर्द और 'हाइड्रोफोबिया' का डर

कोल्शेवाड़ी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक हेमंत गुरव ने बताया कि घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। नोट में युवक ने खुलासा किया कि:

उसे पैर में कुत्ते ने काटा था, जिसे उसने परिवार से छिपाया।

उसने वैक्सीन की केवल एक खुराक ली थी, जो सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं थी।

उसे पानी को देखकर डर (Hydrophobia) लगने लगा था, जो रेबीज के बढ़ते संक्रमण का एक प्रमुख लक्षण है।

वह नहीं चाहता था कि उसका परिवार उसे तड़पते हुए देखे, इसलिए उसने अपनी जीवनलीला समाप्त करने का फैसला किया।

"मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। मैं बस अपने परिवार को अपनी इस हालत और पीड़ा का गवाह नहीं बनने देना चाहता था।"

(सुसाइड नोट का अंश)

डॉक्टरों की सलाह: डरें नहीं, सतर्क रहें

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज एक घातक बीमारी जरूर है, लेकिन यह पूरी तरह से बचाव योग्य (Preventable) है। यदि समय पर और सही तरीके से उपचार किया जाए, तो जान बचाई जा सकती है।

क्या करें (तत्काल कदम)क्या न करें
घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से 15 मिनट तक धोएं।घाव को नजरअंदाज न करें, चाहे वह मामूली खरोंच ही क्यों न हो।
बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।घरेलू नुस्खे या झाड़-फूंक पर भरोसा न करें।
एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स (सभी खुराकें) लें।वैक्सीन की खुराक बीच में न छोड़ें।

निष्कर्ष:

यह घटना हमें सिखाती है कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को परिवार से छिपाना खतरनाक हो सकता है। समय पर लिया गया डॉक्टरी परामर्श न केवल बीमारी को ठीक करता है, बल्कि मानसिक तनाव से भी मुक्ति दिलाता है।

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