भारतीय सोलर उद्योग को बड़ा झटका: अमेरिका ने प्रस्तावित किया 126% तक का भारी आयात शुल्क

वैश्विक सौर ऊर्जा बाजार में अपनी पैठ बना रहे भारतीय सौर निर्माताओं के लिए अमेरिका से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत से आयात होने वाले सोलर मॉड्यूल पर प्रारंभिक तौर पर 126% तक का भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। अमेरिका का तर्क है कि भारतीय कंपनियों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी के कारण वहां के उत्पादक अमेरिकी बाजार में घरेलू निर्माताओं को 'अनुचित प्रतिस्पर्धा' से पछाड़ रहे हैं।

25 Feb 2026  |  8

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: वैश्विक सौर ऊर्जा बाजार में अपनी पैठ बना रहे भारतीय सौर निर्माताओं के लिए अमेरिका से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत से आयात होने वाले सोलर मॉड्यूल पर प्रारंभिक तौर पर 126% तक का भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। अमेरिका का तर्क है कि भारतीय कंपनियों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी के कारण वहां के उत्पादक अमेरिकी बाजार में घरेलू निर्माताओं को 'अनुचित प्रतिस्पर्धा' से पछाड़ रहे हैं।

एशियाई देशों पर टैरिफ की मार

अमेरिकी जांच के दायरे में केवल भारत ही नहीं, बल्कि इंडोनेशिया और लाओस भी शामिल हैं। प्रस्तावित शुल्कों का विवरण कुछ इस प्रकार है:

भारत: 126% तक का प्रारंभिक शुल्क।

इंडोनेशिया: 86% से 143% के बीच।

लाओस: लगभग 81% तक का शुल्क।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों के उत्पादों को मिलने वाले सब्सिडी समर्थन से अमेरिकी घरेलू सोलर उद्योग को नुकसान पहुँच रहा है।

भारतीय निर्यात में भारी उछाल और अब संकट के बादल

आंकड़े बताते हैं कि भारत के लिए अमेरिकी बाजार कितनी तेजी से बढ़ रहा था। वर्ष 2024 में अमेरिका ने भारत से करीब 792.6 मिलियन डॉलर का सोलर आयात किया, जो 2022 की तुलना में नौ गुना से भी अधिक है। 2025 की पहली छमाही में अमेरिका के कुल सोलर मॉड्यूल आयात का 57% हिस्सा भारत, इंडोनेशिया और लाओस से ही आया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 126% का यह शुल्क स्थाई रूप से लागू होता है, तो भारतीय निर्माताओं के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे लगभग बंद हो सकते हैं, क्योंकि उनकी लागत प्रतिस्पर्धात्मक नहीं रह जाएगी।

लागत बढ़ने की आशंका और व्यापारिक तनाव

एक ओर जहाँ 'अलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड' जैसे समूह इसे अमेरिकी निवेश और नौकरियों की सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोलर प्रोजेक्ट डेवलपर्स ने चेतावनी दी है कि इससे लागत में भारी वृद्धि होगी।

उपभोक्ताओं पर असर: सोलर पैनल महंगे होने से आम उपभोक्ताओं के लिए हरित ऊर्जा की लागत बढ़ सकती है।

व्यापारिक अनिश्चितता: यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव कम करने के लिए द्विपक्षीय समझौते हुए थे।

आगे क्या?

यह अभी एक प्रारंभिक प्रस्ताव है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग की अंतिम रिपोर्ट 6 जुलाई को जारी होने की संभावना है। इसके साथ ही, इन देशों से आयातित सोलर सेल्स पर 'एंटी-डंपिंग' जांच भी जारी है। यदि अंतिम फैसला भी कड़ा रहता है, तो वैश्विक सोलर सप्लाई चेन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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