इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति के लिए मास्टरप्लान: NMP 2.0 से लिक्विड होगी देश की संपत्ति, ₹16.7 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य
भारत सरकार ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए 'नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन' (NMP) के दूसरे चरण का बिगुल फूंक दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को NMP 2.0 लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य सरकारी संपत्तियों के जरिए फंड जुटाकर नए 'ग्रीनफील्ड' प्रोजेक्ट्स को गति देना है। 2025 से 2030 के बीच प्रभावी होने वाला यह प्लान भारत की जीडीपी में 40 लाख करोड़ रुपये के योगदान का अनुमान लगाता है।
25 Feb 2026
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नई दिल्ली | भारत सरकार ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए 'नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन' (NMP) के दूसरे चरण का बिगुल फूंक दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को NMP 2.0 लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य सरकारी संपत्तियों के जरिए फंड जुटाकर नए 'ग्रीनफील्ड' प्रोजेक्ट्स को गति देना है। 2025 से 2030 के बीच प्रभावी होने वाला यह प्लान भारत की जीडीपी में 40 लाख करोड़ रुपये के योगदान का अनुमान लगाता है।
निजीकरण नहीं, बल्कि 'कैपिटल रीसाइक्लिंग'
सरकार ने स्पष्ट किया है कि NMP 2.0 निजीकरण (Privatization) नहीं है। इसके तहत संपत्तियों का मालिकाना हक सरकार के पास ही रहेगा। निजी क्षेत्र को केवल एक निश्चित समय के लिए इन 'ब्राउनफील्ड' संपत्तियों (जो पहले से तैयार और ऑपरेशनल हैं) को चलाने, उनका रख-रखाव करने और राजस्व कमाने का अधिकार दिया जाएगा।
NMP 2.0: आंकड़ों का गणित
नीति आयोग द्वारा तैयार इस पाइपलाइन का पैमाना पहले चरण (NMP 1.0) से कहीं बड़ा है:
कुल एसेट्स: 12 मंत्रालयों की 2,000 से अधिक संपत्तियां।
कुल लक्ष्य: ₹16.7 लाख करोड़ का रेवेन्यू पोटेंशियल।
अल्पकालिक लक्ष्य: ₹10.8 लाख करोड़ (2025-26 से 2029-30 के बीच)।
NMP 1.0 का प्रदर्शन: ₹6 लाख करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹5.3 लाख करोड़ जुटाने में सफल रहा।
प्रमुख सेक्टर और उनके टारगेट
NMP 2.0 के तहत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
| सेक्टर | अनुमानित रेवेन्यू (₹ करोड़) | प्रमुख एसेट्स |
|---|---|---|
| सड़क व परिवहन | 4.42 लाख करोड़ | हाईवे, लॉजिस्टिक्स पार्क, रोपवे |
| पावर (ऊर्जा) | 2.76 लाख करोड़ | ट्रांसमिशन लाइन, जेनरेशन एसेट्स |
| शिपिंग व पोर्ट्स | 2.63 लाख करोड़ | पोर्ट टर्मिनल, कार्गो हैंडलिंग |
| रेलवे | 2.62 लाख करोड़ | फ्रेट कॉरिडोर, स्टेशन पुनर्विकास |
| कोयला व खनन | 3.00 लाख करोड़+ | खदानें और संबंधित बुनियादी ढांचा |
अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरी कवायद का मकसद 'बैलेंस शीट मैनेजमेंट' है।
जीडीपी को बूस्ट: अगले 5 से 10 वर्षों में अर्थव्यवस्था पर 40 लाख करोड़ रुपये का सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
नया निवेश: मोनेटाइजेशन से मिलने वाले 6.2 लाख करोड़ रुपये (केंद्र और PSU) से कुल 12.2 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश सृजित हो सकता है।
रोजगार सृजन: सीमेंट, स्टील, लॉजिस्टिक्स और लेबर सेक्टर में मांग बढ़ने से लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
राजस्व का बंटवारा: अनुमानित ₹10.8 लाख करोड़ में से लगभग ₹4.61 लाख करोड़ सीधे केंद्र के संचित कोष में जाएंगे, जबकि राज्यों को ₹38,418 करोड़ मिलेंगे।
निष्कर्ष: बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग मॉडल
NMP 2.0 के जरिए सरकार अपनी 'इलिक्विड' (फंसी हुई) संपत्तियों को 'लिक्विड' (नकदी) संसाधनों में बदल रही है। यह मॉडल बिना कर्ज लिए या राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ाए देश में नए हाईवे, रेल कॉरिडोर और मॉडर्न एयरपोर्ट्स बनाने की क्षमता देता है। हालांकि, इसकी सफलता मंत्रालयों के बीच समन्वय और समय पर ट्रांजैक्शन पूरा करने पर निर्भर करेगी।