आयकर सुधार 2.0: नए टैक्स ड्राफ्ट में 'रिश्तों' का हिसाब और कॉर्पोरेट पारदर्शिता पर प्रहार
भारत सरकार ने छह दशक पुराने आयकर कानून को विदा कर नए आयकर अधिनियम, 2025 की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट नियमों और फॉर्म्स ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी 1 अप्रैल, 2026 से कर प्रणाली न केवल डिजिटल होगी, बल्कि अधिक जवाबदेह और पारदर्शी भी होगी। इस नए ढांचे में जहां नौकरीपेशा लोगों के लिए एचआरए दावों को लेकर सख्ती बढ़ी है, वहीं कंपनियों और ऑडिटर्स की जवाबदेही के दायरे को भी व्यापक बनाया गया है।
25 Feb 2026
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नई दिल्ली | भारत सरकार ने छह दशक पुराने आयकर कानून को विदा कर नए आयकर अधिनियम, 2025 की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट नियमों और फॉर्म्स ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी 1 अप्रैल, 2026 से कर प्रणाली न केवल डिजिटल होगी, बल्कि अधिक जवाबदेह और पारदर्शी भी होगी। इस नए ढांचे में जहां नौकरीपेशा लोगों के लिए एचआरए दावों को लेकर सख्ती बढ़ी है, वहीं कंपनियों और ऑडिटर्स की जवाबदेही के दायरे को भी व्यापक बनाया गया है।
HRA क्लेम: अब केवल रसीद से काम नहीं चलेगा
फर्जी रेंटल क्लेम के जरिए टैक्स बचाने के खेल पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने 'फॉर्म 124' पेश किया है। अब कर्मचारियों को एचआरए (HRA) छूट का दावा करते समय अपने नियोक्ता को यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि मकान मालिक के साथ उनका क्या रिश्ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से उन मामलों की पहचान आसान हो जाएगी जहाँ लोग बिना वास्तविक भुगतान या स्वामित्व के केवल कागजी खानापूर्ति कर छूट लेते थे। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि वास्तविक किराएदारों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है; यह नियम केवल 'आर्टिफिशियल क्लेम्स' को फिल्टर करने के लिए है।
कॉर्पोरेट जगत पर 'ऑडिट' का पहरा
कंपनियों के लिए 'फॉर्म 26' के जरिए टैक्स ऑडिट के नियमों को और कड़ा कर दिया गया है। अब कंपनियों को यह अनिवार्य रूप से बताना होगा कि उनके वैधानिक ऑडिटर (Statutory Auditor) की किसी भी प्रतिकूल टिप्पणी या आपत्ति का उनकी आय, लाभ या हानि पर क्या असर पड़ा है।
विदेशी आय पर नजर: विदेशी टैक्स क्रेडिट (FTC) के लिए प्रस्तावित फॉर्म 44 ने ऑडिटर्स की जिम्मेदारी बढ़ा दी है। अब उन्हें विदेशी टैक्स सर्टिफिकेट और एक्सचेंज रेट की स्वतंत्र रूप से जांच करनी होगी।
डेटा और सर्वर की जानकारी: अब कंपनियों को अपनी ऑडिट रिपोर्ट में यह भी खुलासा करना होगा कि उनका एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर और क्लाउड स्टोरेज कहाँ (किस आईपी एड्रेस और देश में) स्थित है। साथ ही भारत में फिजिकल बैकअप सर्वर का पता देना भी अनिवार्य होगा।
पैन (PAN) और पहचान की शुचिता
डेटाबेस में गड़बड़ी और पहचान के हेरफेर को रोकने के लिए 'पैन' के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब संस्थाओं को नया पैन आवेदन करते समय यह घोषणा करनी होगी कि उनके पास पहले से कोई पैन मौजूद नहीं है। इससे एक ही संस्था द्वारा अलग-अलग शाखाओं के नाम पर कई पैन रखने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
निष्कर्ष: अगले महीने इन ड्राफ्ट नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह स्पष्ट है कि आगामी कर व्यवस्था 'डेटा-संचालित' होगी, जिसमें फर्जी दावों की गुंजाइश न्यूनतम और संस्थागत ईमानदारी का स्तर सर्वोच्च होगा।