मिडिल ईस्ट में महासंग्राम की आहट और पीएम मोदी का इजरायल दौरा: 'हेक्सागन एलायंस' से क्यों कांप रहा है पाकिस्तान?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिवसीय ऐतिहासिक दौरे पर इजरायल पहुँचे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व (Middle East) दोहरे संघर्ष की कगार पर खड़ा है—एक ओर गाजा में तनाव जारी है और दूसरी ओर ईरान-अमेरिका के बीच सैन्य टकराव की संभावना गहरा गई है। इस अशांति के बीच मोदी और नेतन्याहू की मुलाकात ने पड़ोसी देश पाकिस्तान और कई इस्लामिक देशों की नींद उड़ा दी है।
25 Feb 2026
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येरूशलम/दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिवसीय ऐतिहासिक दौरे पर इजरायल पहुँचे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व (Middle East) दोहरे संघर्ष की कगार पर खड़ा है—एक ओर गाजा में तनाव जारी है और दूसरी ओर ईरान-अमेरिका के बीच सैन्य टकराव की संभावना गहरा गई है। इस अशांति के बीच मोदी और नेतन्याहू की मुलाकात ने पड़ोसी देश पाकिस्तान और कई इस्लामिक देशों की नींद उड़ा दी है।
पाकिस्तान की चिंता: 'खतरे की घंटी' और ऑपरेशन सिंदूर
पाकिस्तानी मीडिया पीएम मोदी के इस दौरे को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मान रहा है।
मीडिया का रुख: पाकिस्तानी अखबार डॉन और टीवी चैनल जियो न्यूज ने इसे 'पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी' करार दिया है।
ऑपरेशन सिंदूर का डर: पाकिस्तानी मीडिया ने याद दिलाया कि पिछले साल 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान इजरायली ड्रोन टेक्नोलॉजी ने पाकिस्तान की डिफेंस स्ट्रैटजी को ध्वस्त करने में भारत की बड़ी मदद की थी।
क्या है 'हेक्सागन एलायंस' (Hexagon Alliance)?
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने मोदी के आने से पहले एक नए रणनीतिक समूह का जिक्र किया, जिसे 'हेक्सागन एलायंस' कहा जा रहा है।
मकसद: नेतन्याहू ने कट्टर शिया और सुन्नी एक्सिस को साझा खतरा बताते हुए भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ चुनिंदा अरब व एशियाई देशों के साथ एक मजबूत फ्रंट बनाने की बात कही है।
विपक्ष: पाकिस्तान की संसद ने इस बयान के खिलाफ प्रस्ताव तक पारित कर दिया है, क्योंकि वे इसे अपने खिलाफ एक घेराबंदी के रूप में देख रहे हैं।
भारत की 'डी-हाइफनेशन' नीति और वैश्विक नजरिया
अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने भारत की बदलती कूटनीति पर तीखी टिप्पणी की है:
| मीडिया आउटलेट | मुख्य टिप्पणी |
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| अल जजीरा | 2014 के बाद भारत इजरायल का सबसे बड़ा हथियार खरीदार बन गया है। दोनों देश इस्लामी आतंकवाद को साझा दुश्मन मानते हैं। |
| मिडिल ईस्ट मॉनिटर | भारत ने फिलिस्तीन और इजरायल के रिश्तों को अलग करके देखना शुरू कर दिया है। वह फिलिस्तीन का समर्थन तो करता है, लेकिन इजरायल के साथ साझेदारी को और गहरा कर रहा है। |
दौरे का खास महत्व: केनेसेट में गूंजेगा भारत का स्वर
पीएम मोदी इजरायली संसद (Knesset) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। यह सम्मान दर्शाता है कि भारत अब मिडिल ईस्ट में केवल एक मूकदर्शक नहीं, बल्कि एक 'पावर प्लेयर' के रूप में उभरा है।
पीएम मोदी ने पहुँचते ही स्पष्ट किया— "मैं द्विपक्षीय चर्चाओं और भारत-इजरायल मित्रता को मजबूत करने वाले सार्थक परिणामों की आशा करता हूं।"
अगला कदम: यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस दौरे के दौरान भारत 'हेक्सागन एलायंस' पर कोई आधिकारिक मोहर लगाता है, जो मिडिल ईस्ट के शक्ति संतुलन को हमेशा के लिए बदल सकता है।