डिजिटल इंडिया का नया अध्याय: 'जनगणना 2027' होगी पूरी तरह पेपरलेस, मोबाइल ऐप और जियो-टैगिंग से दर्ज होंगे आंकड़े

भारत की आगामी जनगणना एक ऐतिहासिक बदलाव की साक्षी बनने जा रही है। जनगणना 2027 के साथ देश अपनी पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना की शुरुआत करेगा। पारंपरिक कागजी फॉर्म और भारी-भरकम रजिस्टरों की जगह अब मोबाइल डिवाइस, जियो-टैगिंग और वेब-आधारित केंद्रीकृत प्लेटफार्मों ने ले ली है। इस आधुनिक पहल का उद्देश्य डेटा संग्रह की शुद्धता को बढ़ाना और परिणामों के संकलन में लगने वाले समय को कम करना है।

26 Feb 2026  |  9

नई दिल्ली। भारत की आगामी जनगणना एक ऐतिहासिक बदलाव की साक्षी बनने जा रही है। जनगणना 2027 के साथ देश अपनी पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना की शुरुआत करेगा। पारंपरिक कागजी फॉर्म और भारी-भरकम रजिस्टरों की जगह अब मोबाइल डिवाइस, जियो-टैगिंग और वेब-आधारित केंद्रीकृत प्लेटफार्मों ने ले ली है। इस आधुनिक पहल का उद्देश्य डेटा संग्रह की शुद्धता को बढ़ाना और परिणामों के संकलन में लगने वाले समय को कम करना है।

CMMS: जनगणना का 'डिजिटल दिमाग'

इस विशाल प्रशासनिक अभ्यास के संचालन के लिए 'जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली' (CMMS) नाम का एक विशेष पोर्टल तैयार किया गया है। यह पोर्टल न केवल डेटा संकलित करेगा, बल्कि इसके जरिए 32 लाख फील्ड कार्यकर्ताओं (प्रगणकों और पर्यवेक्षकों) की नियुक्ति, प्रशिक्षण और उनकी रियल-टाइम निगरानी भी की जाएगी।

डिजिटल जनगणना की 3 प्रमुख विशेषताएं:

जियो-टैगिंग: वेब-आधारित मैपिंग टूल के जरिए हर घर की जियो-टैगिंग की जाएगी, जिससे सीमाओं का सटीक निर्धारण होगा और डेटा में दोहराव की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

स्व-गणना (Self-Enumeration): नागरिकों के पास यह विकल्प होगा कि वे स्वयं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना विवरण दर्ज कर सकें।

त्वरित सत्यापन: मोबाइल ऐप के जरिए एकत्र किया गया डेटा तुरंत सर्वर पर अपलोड होगा, जिससे विसंगतियों को मौके पर ही ठीक किया जा सकेगा।

पहली बार शामिल होगी 'जाति गणना'

स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहली बार होगा कि सामान्य जनगणना के साथ जाति गणना को भी शामिल किया गया है। इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। यह कदम सामाजिक-आर्थिक नीतियों के बेहतर निर्माण और लक्षित विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया

कोविड-19 महामारी के कारण देरी से हो रही यह 16वीं जनगणना दो मुख्य चरणों में आयोजित की जाएगी:

प्रथम चरण (अप्रैल से सितंबर 2026): इस दौरान 'मकान सूचीकरण' और 'आवास गणना' का कार्य होगा, जिसमें नागरिकों से कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे।

द्वितीय चरण (फरवरी 2027): इस मुख्य चरण में वास्तविक जनसंख्या गणना की जाएगी।

भविष्य की योजनाओं का आधार

भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण के अनुसार, यह डिजिटल डेटाबेस न केवल आबादी की गिनती करेगा, बल्कि भविष्य में आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचे के विकास और सटीक सरकारी योजनाएं तैयार करने के लिए एक विश्वसनीय डिजिटल एसेट के रूप में काम करेगा।

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