नई दिल्ली/मुंबई: दुनिया के सबसे बड़े सोयाबीन तेल आयातक, भारत ने दक्षिण अमेरिका से आने वाले तेल के कई कार्गो (शिपमेंट) रद्द कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में आई अचानक तेजी के बाद भारतीय व्यापारियों ने तेल की डिलीवरी लेने के बजाय सौदों को वापस बेचकर मुनाफा कमाना (Profit Booking) बेहतर समझा है।
'वॉशआउट' का खेल: बिना तेल मंगाए करोड़ों की कमाई
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में भारतीय व्यापारियों ने अप्रैल से जुलाई के बीच आने वाले लगभग 65,000 से 75,000 टन सोयाबीन तेल के सौदे रद्द किए हैं।
कैसे हुआ मुनाफा? व्यापारियों ने ये सौदे तब बुक किए थे जब कीमत $1,080 से $1,100 प्रति टन थी। अब कीमतें बढ़कर $1,140 से $1,147.50 तक पहुंच गई हैं।
नतीजा: डिलीवरी लेने के बजाय व्यापारियों ने इन अनुबंधों को वापस आपूर्तिकर्ता (Supplier) को बेच दिया, जिससे उन्हें प्रति टन $40 से $60 का सीधा लाभ हुआ।
पतंजलि फूड्स लिमिटेड के उपाध्यक्ष आशीष आचार्य के अनुसार, आने वाले दिनों में रद्द किए गए सौदों (Washouts) की मात्रा 1 लाख से 1.20 लाख टन तक पहुंच सकती है।
क्यों रद्द हो रहे हैं शिपमेंट?
इस बड़े फैसले के पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
शिकागो फ्यूचर्स में तेजी: ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और अमेरिका में बायोफ्यूल की मांग के कारण सोयाबीन तेल की कीमतें दो साल के उच्चतम स्तर पर हैं।
बम्पर पैदावार की उम्मीद: दक्षिण अमेरिका (ब्राजील और अर्जेंटीना) में इस साल सोयाबीन की रिकॉर्ड फसल होने की उम्मीद है। व्यापारियों का मानना है कि अप्रैल के बाद जब यह फसल बाजार में आएगी, तो कीमतें फिर से गिरेंगी।
घरेलू जोखिम से बचाव: अगर व्यापारी अभी महंगे दाम पर तेल मंगा लेते और बाद में घरेलू बाजार में कीमतें गिर जातीं, तो उन्हें भारी नुकसान होता। इसलिए अभी मुनाफा बुक करना सुरक्षित समझा गया।
दक्षिण अमेरिकी फसल का इंतजार
कालीसुवरी इंटरकांटिनेंटल के ट्रेडिंग हेड जी. त्यागराजन के मुताबिक, अप्रैल से जुलाई के बीच दक्षिण अमेरिकी फसल बाजार में दस्तक देगी। इससे वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों में गिरावट की संभावना है। इसी गिरावट के डर और वर्तमान उच्च कीमतों के लालच ने भारतीय आयातकों को 'वॉशआउट' के लिए प्रेरित किया है।
पिछली घटनाओं का सिलसिला
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने शिपमेंट रद्द किए हैं:
दिसंबर: अर्जेंटीना के साथ 1 लाख टन से अधिक के सौदे रद्द या विलंबित हुए थे।
साल की शुरुआत: रुपये की कमजोरी के कारण ब्राजील और अर्जेंटीना से 35,000-40,000 टन के सौदे रद्द हुए थे क्योंकि आयात करना महंगा पड़ रहा था।
| विवरण | सांख्यिकी (प्रति टन) |
|---|---|
| पुराना अनुबंध मूल्य | $1,080 – $1,100 |
| वर्तमान बाजार मूल्य | $1,140 – $1,147.50 |
| प्रति टन अनुमानित मुनाफा | $40 – $60 |
| कुल रद्द मात्रा (अनुमानित) | 1,00,000 – 1,20,000 टन |