पश्चिम एशिया संकट: भारत के $11.8 अरब के कृषि निर्यात पर मंडराया खतरा; चावल और चाय उत्पादक चिंतित

पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष ने न केवल कूटनीतिक तनाव बढ़ाया है, बल्कि भारत के विशाल कृषि और खाद्य निर्यात क्षेत्र के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। आर्थिक थिंक टैंक GTRI (ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव) की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के कारण बाधित शिपिंग रूट, बढ़ता बीमा खर्च और रसद (Logistics) की अनिश्चितता ने $11.8 अरब (लगभग ₹98,000 करोड़) के व्यापार को जोखिम में डाल दिया है।

09 Mar 2026  |  130

नई दिल्ली | आर्थिक ब्यूरो पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष ने न केवल कूटनीतिक तनाव बढ़ाया है, बल्कि भारत के विशाल कृषि और खाद्य निर्यात क्षेत्र के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। आर्थिक थिंक टैंक GTRI (ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव) की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के कारण बाधित शिपिंग रूट, बढ़ता बीमा खर्च और रसद (Logistics) की अनिश्चितता ने $11.8 अरब (लगभग ₹98,000 करोड़) के व्यापार को जोखिम में डाल दिया है।

निर्यात की जीवन रेखा: 21.8% की हिस्सेदारी दांव पर

वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल कृषि निर्यात का 21.8 प्रतिशत हिस्सा अकेले पश्चिम एशिया को जाता है।

मुख्य उत्पाद: अनाज (विशेषकर चावल), फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और मसाले इस निर्यात बास्केट का मुख्य हिस्सा हैं।

बाजार की अहमियत: भौगोलिक निकटता और वहां रहने वाले विशाल भारतीय समुदाय के कारण खाड़ी देश भारत के लिए एक प्राकृतिक बाजार रहे हैं।

चावल उत्पादकों पर सबसे बड़ी मार

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, सबसे अधिक प्रभाव चावल के निर्यात पर पड़ने की आशंका है।

भारत ने पश्चिम एशिया को $4.43 अरब का चावल निर्यात किया, जो भारत के वैश्विक चावल निर्यात का 36.7% है।

इसका सीधा असर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के किसानों और उत्पादकों पर पड़ेगा।

चाय और मसालों का संकट: असम-बंगाल की चिंता बढ़ी

असम और पश्चिम बंगाल में पैदा होने वाली ऑर्थोडॉक्स चाय (Leaf Tea) का ईरान, इराक और यूएई में बड़ा बाजार है।

भारत ने इस क्षेत्र को $410.1 मिलियन की चाय निर्यात की है।

घरेलू बाजार पर असर: विशेषज्ञों को डर है कि यदि निर्यात रुकता है, तो चाय की अतिरिक्त आपूर्ति घरेलू बाजार में आ जाएगी, जिससे कीमतों में भारी गिरावट हो सकती है और बागान मालिकों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

बढ़ती लागत और रसद की चुनौतियां

रिपोर्ट के मुताबिक, युद्धग्रस्त क्षेत्र होने के कारण मालवाहक जहाजों के लिए बीमा प्रीमियम (Insurance Costs) कई गुना बढ़ गया है। साथ ही, सुरक्षित रास्तों की तलाश में जहाजों को लंबा सफर तय करना पड़ रहा है, जिससे माल भाड़ा और समय दोनों बढ़ रहे हैं।

GTRI का मुख्य निष्कर्ष: > "2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को $7.48 अरब के अनाज, फल और मसाले भेजे, जो वैश्विक स्तर पर इस श्रेणी के निर्यात का 29.2% है। इस अस्थिरता से भारत की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।"

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