नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर दो बड़ी वैश्विक संस्थाओं—S&P Global और Goldman Sachs—ने अलग-अलग तस्वीरें पेश की हैं। जहाँ एक ओर भारत की घरेलू मांग को 'ढाल' बताया जा रहा है, वहीं तेल आपूर्ति में संभावित रुकावट को 'सबसे बड़ा खतरा' माना जा रहा है।
1. S&P Global: 7.1% ग्रोथ के साथ भारत बनेगा 'ग्लोबल इंजन'
S&P Global ने भारत की मजबूती पर भरोसा जताते हुए वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है।
घरेलू मांग का सहारा: एजेंसी का मानना है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती खपत और सरकारी बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर खर्च भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनाए रखेगा।
FY26 का अनुमान: रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (FY26) में भारत की विकास दर 7.6% रहने की संभावना है। निजी निवेश में सुधार और सर्विस सेक्टर की बढ़त इसे गति देगी।
2. Goldman Sachs: तेल संकट और महंगाई की चेतावनी
इसके विपरीत, Goldman Sachs ने चेतावनी दी है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में संभावित रुकावट के कारण भारत की ग्रोथ रेट 2026 में घटकर 5.9% रह सकती है (जो पहले 6.5% अनुमानित थी)।
महंगाई का दबाव: एजेंसी ने महंगाई (CPI) का अनुमान बढ़ाकर 4.6% कर दिया है।
आयात पर निर्भरता: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88% हिस्सा आयात करता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का मतलब है भारत की 'लाइफलाइन' का कटना, जिससे बजट घाटा और सब्सिडी (खाद व रसोई गैस) का बोझ असहनीय हो सकता है।
सरकार का 'एक्शन प्लान': विकल्प की तलाश
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में आश्वस्त किया है कि सरकार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। सरकार की रणनीति के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
इथेनॉल ब्लेंडिंग: पिछले दशक में इथेनॉल उत्पादन और पेट्रोल में इसकी मिक्सिंग पर काफी काम हुआ है, जिससे कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
गैस सप्लाई चैन: एलपीजी की कमी को देखते हुए सरकार ने गैस आपूर्ति के लिए एक 'कॉम्प्रेहेंसिव प्लान' तैयार किया है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को किल्लत न हो।
विविधीकरण: भारत अब केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय रूस और अन्य क्षेत्रों से तेल आयात के वैकल्पिक रास्तों पर काम कर रहा है।
तुलनात्मक चार्ट: आर्थिक अनुमान 2026-27
| मानक | S&P Global (FY27) | Goldman Sachs (2026) |
|---|---|---|
| GDP ग्रोथ | 7.1% (बढ़ाया गया) | 5.9% (घटाया गया) |
| मुख्य आधार | मजबूत घरेलू खपत और निवेश | ऊर्जा संकट और हॉर्मुज का खतरा |
| महंगाई (CPI) | स्थिर रहने की उम्मीद | 4.6% तक बढ़ने की आशंका |
| जोखिम | वैश्विक अनिश्चितता | सप्लाई चैन में रुकावट और सब्सिडी बोझ |
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निष्कर्ष: आगे की राह
भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय एक 'बैलेंसिंग एक्ट' कर रही है। यदि पश्चिम एशिया का तनाव लंबे समय तक खिंचता है, तो सरकार को फर्टिलाइजर और खाद्य सब्सिडी के लिए अतिरिक्त फंड का इंतजाम करना होगा, जिससे राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ सकता है। हालांकि, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और घरेलू बाजार का आकार भारत को अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर स्थिति में रखता है।