खाद संकट की आहट: मिडिल ईस्ट तनाव से भारत में उर्वरक उत्पादन 15% तक घटने की आशंका

मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष का सीधा असर अब भारतीय खेतों और सरकारी खजाने पर पड़ता दिख रहा है। क्रिसिल रेटिंग्स (Crisil Ratings) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सप्लाई चेन में आए व्यवधान के कारण घरेलू स्तर पर यूरिया और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर्स के उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।

26 Mar 2026  |  97

 

नई दिल्ली |  मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष का सीधा असर अब भारतीय खेतों और सरकारी खजाने पर पड़ता दिख रहा है। क्रिसिल रेटिंग्स (Crisil Ratings) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सप्लाई चेन में आए व्यवधान के कारण घरेलू स्तर पर यूरिया और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर्स के उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।

 सरकारी खजाने और कंपनियों पर बढ़ेगा बोझ

रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे माल की कमी और आयातित उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के कारण दोतरफा मार पड़ने वाली है:

सब्सिडी बिल: सरकार का उर्वरक सब्सिडी बिल ₹20,000-25,000 करोड़ तक बढ़ सकता है।

वर्किंग कैपिटल: खाद निर्माता कंपनियों को परिचालन जारी रखने के लिए अधिक कार्यशील पूंजी (Working Capital) की आवश्यकता होगी।

मुनाफे में कमी: कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से फैक्ट्रियों में उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाएगा, जिससे कंपनियों की लाभप्रदता (Profitability) घट सकती है।

 मिडिल ईस्ट पर भारी निर्भरता: एक चुनौती

भारत अपनी उर्वरक जरूरतों के लिए मध्य पूर्व के देशों पर अत्यधिक निर्भर है। आंकड़े स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं:

यूरिया और DAP आयात: वित्त वर्ष 2026 के पहले 9 महीनों में कुल आयात का 40% हिस्सा इसी क्षेत्र से आया है।

कच्चा माल: घरेलू उत्पादन के लिए आवश्यक LNG (60-65%) और अमोनिया (75-80%) का आयात भी मिडिल ईस्ट से ही होता है।

कीमतों में उछाल: संघर्ष शुरू होने के बाद से अमोनिया की कीमतों में लगभग 24% की वृद्धि दर्ज की गई है।

 राहत के दो प्रमुख कारक

क्रिसिल के निदेशक आनंद कुलकर्णी के अनुसार, हालांकि स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन दो चीजें संकट की तीव्रता को कम करेंगी:

सरकारी बैकअप: सरकार ने यूरिया निर्माताओं के लिए 70% गैस आवंटन का निर्देश दिया है। साथ ही, भारत के पास लगभग 3 महीने का स्टॉक (इन्वेंट्री) मौजूद है।

मजबूत लिक्विडिटी: बड़ी खाद कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत है और सरकार का समय पर सब्सिडी देने का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड भरोसेमंद रहा है।

"यदि मिडिल ईस्ट में तनाव तीन महीने से अधिक खिंचता है, तो उत्पादन पर असर गहरा होगा। ऐसे में वैकल्पिक स्रोतों से कच्चे माल का आयात और सरकार द्वारा 'न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी' (NBS) दरों में बढ़ोतरी करना अनिवार्य हो जाएगा।" — क्रिसिल रेटिंग्स

 भारत में उर्वरक खपत का गणित

उर्वरक का प्रकारकुल खपत में हिस्सेदारी
यूरिया45%
कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर्स (DAP/NPK)33.3% (एक-तिहाई)
अन्य (SSP/MOP)शेष हिस्सा

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